भारत का **10-Year Government Bond Yield** फिलहाल **7.18%** के करीब ट्रेड कर रहा है, जो पिछले दो सालों का उच्चतम स्तर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल का असर
बॉन्ड यील्ड में इस उठापटक के पीछे ग्लोबल फैक्टर्स सबसे बड़ी वजह हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $107 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव है। इसके अलावा, 10-Year US Treasury Yield का 5.27% पर पहुंचना भी भारतीय बाजारों के लिए चिंताजनक है। जब अमेरिका में रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक भारतीय डेट मार्केट से पैसा निकालने लगते हैं, जिससे यील्ड ऊपर जाती है।
सरकार की उधार और लिक्विडिटी
सरकार ने अपनी उधारी (Borrowing) को कम करते हुए सालाना लक्ष्य को ₹16 लाख करोड़ पर रखा है, जो कि बजट के शुरुआती अनुमान ₹17.2 लाख करोड़ से कम है। हालांकि, बाजार की सप्लाई में यह राहत RBI की सख्ती के कारण फीकी पड़ गई है।
RBI की सख्त मौद्रिक नीति
सिस्टम से एक्स्ट्रा लिक्विडिटी सोखने के लिए RBI ने इस साल ₹1 लाख करोड़ की नेट बॉन्ड बिक्री की है। बैंक सिस्टम में नकदी की कमी होने के कारण निवेशकों के पास सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश के लिए कम सरप्लस कैश बचा है। इस स्थिति में, बॉन्ड मार्केट वैश्विक संकेतों और केंद्रीय बैंक की अगली कमेंट्री को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
