भारतीय सरकारी बॉन्ड मार्केट में पिछले **30** सालों का सबसे खराब दौर चल रहा है। लगातार **10** हफ्तों की गिरावट के साथ **10**-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड **7.47%** के स्तर पर पहुंच गई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
सरकारी बॉन्ड मार्केट में जारी यह गिरावट पिछले 30 वर्षों का एक रिकॉर्ड है। मार्केट की भाषा में कहें तो जब यील्ड बढ़ती है, तो बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, जो साफ तौर पर बाजार में घटती मांग का संकेत दे रही हैं।
क्यों दबाव में है मार्केट?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल (Brent Crude) है, जिसकी कीमतें 5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। सऊदी अरब में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने तेल के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ रहा है। यही वजह है कि रुपया गिरकर 94.94 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ है।
RBI के रिजर्व पर असर
रुपये को संभालने की जद्दोजहद में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के फॉरेक्स रिजर्व पर भी असर पड़ा है। 16 अक्टूबर को समाप्त हुए हफ्ते में रिजर्व में $5.01 बिलियन की कमी आई है, जिससे कुल रिजर्व घटकर $721.02 बिलियन रह गया है। सितंबर की शुरुआत से अब तक कुल रिजर्व $65 बिलियन कम हो चुका है।
ग्लोबल मार्केट का सेंटिमेंट
फिलहाल निवेशक 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) मोड में हैं और अपना पैसा उभरते बाजारों (Emerging Markets) से निकालकर अमेरिका के सुरक्षित बॉन्ड (US Treasuries) में डाल रहे हैं। अब सबकी नजरें कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर टिकी हैं। अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
