28 अगस्त 2026 को भारत का 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड **6.91%** के दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, RBI के हस्तक्षेप और रिकॉर्ड फॉरेक्स रिजर्व के चलते रुपया **95.39** प्रति डॉलर पर टिका हुआ है।
बॉन्ड मार्केट में हलचल क्यों?
शुक्रवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी देखी गई, जिससे 10-वर्षीय बेंचमार्क नोट 6.91% तक पहुंच गया। यह जून 2026 के मध्य के बाद से उधार लेने की लागत का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड की कीमतों और यील्ड में विपरीत संबंध होता है, इसलिए यील्ड में यह उछाल बॉन्ड बाजार में निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली का संकेत है।
यील्ड और करेंसी को प्रभावित करने वाले कारक
यील्ड पर यह दबाव ग्लोबल और घरेलू दोनों चिंताओं के कारण है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख का इंतजार कर रहे हैं, खासकर जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी में फेड चेयर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की टिप्पणियों पर सभी की नजरें हैं। यदि अमेरिकी सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो इसका असर वैश्विक बॉन्ड बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ना तय है।
घरेलू स्तर पर, RBI का मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख और सरकारी बॉन्ड की सप्लाई की आशंका के चलते निवेशक अब लंबे समय के कर्ज में पैसा लगाने से पहले ज्यादा यील्ड की मांग कर रहे हैं। करेंसी मार्केट में रुपया 95.39 पर बंद हुआ। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की निकासी से दबाव जरूर है, लेकिन RBI का सक्रिय हस्तक्षेप इसे बड़ी गिरावट से बचा रहा है।
फॉरेक्स रिजर्व और लिक्विडिटी की स्थिति
भारत की स्थिति मजबूत है, क्योंकि 21 अगस्त 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) $729.3 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में हालिया गिरावट ने भी रुपये को सहारा दिया है, क्योंकि इससे आयात बिल का बोझ कम हुआ है।
बैंकिंग सिस्टम में अभी भी ₹3.74 ट्रिलियन की अतिरिक्त लिक्विडिटी मौजूद है। हालांकि, बैंक काफी सतर्क हैं और इस कैश को तैनात करने में सावधानी बरत रहे हैं, जिसका प्रमाण RBI के हालिया नीलामियों में कम भागीदारी से मिलता है। अब बाजार की नजरें अमेरिकी फेड की कमेंट्री और विदेशी पूंजी की निकासी पर टिकी हैं।
