भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल देखा गया है, जो **7.21%** के दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। ग्लोबल महंगाई की चिंताओं और शेयर बाजार में जारी भारी बिकवाली के बीच Nifty 50 लगातार आठवें हफ्ते गिरा है, जो पिछले **25 वर्षों** का एक रिकॉर्ड है।
बॉन्ड यील्ड और गिरता बाजार
भारतीय 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 1 अक्टूबर 2026 को 7.21% के दो साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है। यह बढ़त फाइनेंशियल मार्केट में कड़ाई का संकेत है, क्योंकि बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा मतलब है कि सरकार और कंपनियों दोनों के लिए कर्ज लेना महंगा हो गया है। साथ ही, Nifty 50 इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते लाल निशान में बंद हुआ है, जो पिछले 25 वर्षों में इंडेक्स की सबसे लंबी गिरावट है, जो इक्विटी मार्केट में तनाव को साफ दर्शाता है।
ग्लोबल दबाव और महंगाई
स्थानीय बॉन्ड यील्ड में यह तेजी ग्लोबल रुझानों से जुड़ी है। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास पहुंच गई है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर आधारित एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। इसके कारण भारतीय बाजार से लगातार विदेशी पूंजी बाहर निकल रही है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं, जो देश के इंपोर्ट बिल और महंगाई को बढ़ा रही हैं। साथ ही, 13% की बारिश की कमी ने खाने-पीने की चीजों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रुपये की चाल और RBI पर नजर
रुपया भी भारी दबाव में है और 1 अक्टूबर को यह 96.31 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर है, जो 5 से 7 अक्टूबर के बीच होनी है। महंगाई को देखते हुए, बाजार को उम्मीद है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह 5.50% तक पहुंच सकता है।
निवेशकों के लिए, उच्च ब्याज दरें कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं। जैसे-जैसे सरकारी बॉन्ड्स पर रिटर्न आकर्षक होगा, शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बना रहना स्वाभाविक है। अब सभी की नजरें RBI के रुख पर हैं कि यह हाई-इंटरेस्ट रेट का चक्र कब तक चलेगा।
