5 अक्टूबर, 2026 को भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड घटकर **7.206%** पर आ गई है। क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और अमेरिका से आए कमजोर जॉब डेटा ने बाजार को थोड़ी राहत दी है, लेकिन निवेशकों की नजर अब RBI की MPC मीटिंग पर टिकी है।
सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार के लिए राहत भरी रही। 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड पिछले सत्र के 7.2133% के मुकाबले मामूली गिरावट के साथ 7.2060% पर कारोबार करती दिखी। हाल के महीनों में बढ़ते कर्ज के दबाव और फिस्कल डेफिसिट की चिंताओं के बीच यह छोटी राहत बॉन्ड मार्केट के लिए मायने रखती है।\n\nइस नरमी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई कमी है। ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर $101 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। भारत के लिए तेल सस्ता होने का मतलब है आयात बिल में कमी, जिससे रुपये में स्थिरता आती है और महंगाई का दबाव भी कम होता है।\n\nबाजार पर ग्लोबल सेंटीमेंट का भी असर दिखा। अमेरिका में सितंबर महीने में केवल 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो 90,000 के अनुमान से काफी कम है। इस आंकड़े ने इस उम्मीद को कम कर दिया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाएगा, जिससे उभरते बाजारों के बॉन्ड पर दबाव थोड़ा कम हुआ है।\n\n### RBI की पॉलिसी पर नजर\n\nहालांकि यील्ड में यह गिरावट आई है, लेकिन अब सारा ध्यान रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) पर है। 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली इस बैठक में जानकारों का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे दरें 5.5% तक पहुंच सकती हैं।\n\nनिकट भविष्य के लिए बाजार अभी भी सतर्क है। भारतीय रुपया 96.22 प्रति डॉलर पर खुला है और विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली जारी है। इसके अलावा, सरकारी उधारी का भारी कार्यक्रम भी बॉन्ड यील्ड में बड़ी गिरावट को सीमित कर रहा है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण 7 अक्टूबर का दिन होगा, जब RBI के नीतिगत फैसले और भविष्य के महंगाई अनुमानों पर स्पष्टता आएगी।
