India Customs Duty: 2027-28 तक कस्टम ड्यूटी होगी सिंगल डिजिट में! समझिए क्या होगा असर

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Customs Duty: 2027-28 तक कस्टम ड्यूटी होगी सिंगल डिजिट में! समझिए क्या होगा असर

भारत सरकार साल 2027-28 तक कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) को घटाकर सिंगल डिजिट में लाने की तैयारी में है। इस बड़े कदम से देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार आसान होगा और टैक्स की दिक्कतों को दूर किया जाएगा।

कस्टम ड्यूटी में बड़े बदलाव की तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि भारत सरकार देश के कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका लक्ष्य 2027-28 के बजट तक लगभग सभी इंपोर्टेड सामानों पर टैरिफ रेट को सिंगल डिजिट में लाना है। यह जानकारी वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दी।

व्यापार को आसान बनाने का लक्ष्य

इस सुधार का मुख्य उद्देश्य व्यापार को और भी ज़्यादा अनुमानित बनाना और भारत में बिजनेस करने की आसानी को बेहतर बनाना है। वर्तमान में, कस्टम ड्यूटी के कई स्लैब हैं, जिससे यह काफी जटिल हो जाता है। एक समान, सिंगल-डिजिट स्ट्रक्चर की ओर बढ़ने से सरकार इस जटिलता को कम करना चाहती है। हालांकि, 13 खास आइटम्स को इस नए नियम से बाहर रखा जाएगा, जिनकी लिस्ट अभी जारी नहीं की गई है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

यह नीतिगत बदलाव विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। इस तर्कसंगतता के प्राथमिक लक्ष्यों में से एक 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' को ठीक करना है। सीधे शब्दों में कहें तो, जब कच्चे माल के इंपोर्ट पर टैक्स, तैयार उत्पाद के इंपोर्ट पर टैक्स से ज़्यादा होता है, तो ऐसी स्थिति बनती है। इससे स्थानीय फैक्ट्रियों को नुकसान होता है क्योंकि वे घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग करने के बजाय तैयार माल इंपोर्ट करना ज़्यादा सस्ता पाते हैं। इन असंतुलनों को ठीक करके, सरकार 'मेक इन इंडिया' (Make in India) को बढ़ावा देना और स्थानीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद करना चाहती है।

दो-तरफा प्रभाव

हालांकि, इसके दो-तरफा प्रभाव पर भी विचार करना होगा। जो कंपनियां कच्चे माल या कंपोनेंट्स के इंपोर्ट पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, उन्हें संभवतः कम टैक्स लागत से फायदा होगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन को बचाने या सुधारने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, घरेलू उद्योग, जो ऐतिहासिक रूप से विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा के लिए उच्च इंपोर्ट टैरिफ पर निर्भर रहे हैं, उन्हें नए दबाव का सामना करना पड़ सकता है। जैसे-जैसे ये सुरक्षात्मक दीवारें कम होंगी, इन कंपनियों को अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए और अधिक कुशल बनने की आवश्यकता हो सकती है।

सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का समर्थन करने और स्थिर टैक्स राजस्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बीच संतुलन बना रही है। यह बदलाव धीरे-धीरे होगा, क्योंकि लक्ष्य 2027-28 के बजट के लिए निर्धारित है। निवेशकों के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम यह देखना होगा कि कौन से 13 आइटम्स सिंगल-डिजिट टैक्स रूल से बाहर रहते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों को अर्थव्यवस्था के बाकी हिस्सों की तुलना में अलग व्यापार शर्तों का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.