India vs China: 2036 में अमीर उपभोक्ताओं के मामले में भारत चीन को पछाड़ देगा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India vs China: 2036 में अमीर उपभोक्ताओं के मामले में भारत चीन को पछाड़ देगा

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2036 तक भारत में **10.8 करोड़** अमीर कंज्यूमर होंगे, जो चीन के **10.3 करोड़** से ज्यादा होंगे। यह दिखाता है कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स की डिमांड लंबे समय तक बढ़ेगी। यह ग्रोथ लग्जरी और प्रीमियम सेक्टर्स के लिए अवसर तो लाएगा, लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि मास-मार्केट डिमांड और प्राइस सेंसिटिविटी कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

भारत में बढ़ रही अमीरों की तादाद

आने वाले दशक में भारत हाई-स्पेंडिंग कंज्यूमर का एक बड़ा हब बनने की राह पर है। NielsenIQ (NIQ) और World Data Lab की एक नई रिपोर्ट बताती है कि 2036 तक भारत में 10.8 करोड़ (108 मिलियन) ऐसे लोग होंगे जो रोज $90 से ज्यादा खर्च कर सकते हैं। यह संख्या चीन के अनुमानित 10.3 करोड़ (103 मिलियन) से ज्यादा होगी।

प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बहार

यह प्रोजेक्शन भारतीय इकोनॉमी में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जिसे 'प्रीमियम-ईज़ेशन' कहा जा रहा है। जैसे-जैसे लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ रही है, ज्यादा से ज्यादा लोग क्वालिटी, स्टेटस और सुविधा पर ज्यादा खर्च करना चाहते हैं। इस ट्रेंड का फायदा FMCG (Fast Moving Consumer Goods), लग्जरी रिटेल, फाइनेंशियल सर्विसेज और ट्रैवल जैसे सेक्टर्स को मिल रहा है। जिन कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स को हाई-वैल्यू वाले बनाने के लिए बदलाव किया है, उन्हें इस जनसांख्यिकीय बदलाव से सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2026 और 2036 के बीच 8.2 करोड़ (82 मिलियन) नए अमीर कंज्यूमर जोड़ेगा, जो दुनिया में सबसे तेज ग्रोथ है। हालांकि, यह अच्छी तस्वीर के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। हाल के सालों में ग्लोबल FMCG सेक्टर में कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसने कंज्यूमर खर्च की क्षमता को परखा है।

वैल्यू और प्रीमियम का संतुलन

अमीर सेगमेंट में क्लियर ग्रोथ के बावजूद, भारतीय मार्केट प्राइस और वैल्यू को लेकर बहुत सेंसिटिव है। जो कंज्यूमर ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं, वे भी 'वैल्यू-फॉर-मनी' का ध्यान रखते हैं। अगर प्रीमियम प्रोडक्ट की कीमत के हिसाब से उसका फायदा महसूस नहीं होता, तो कंज्यूमर सस्ते विकल्पों की ओर मुड़ जाते हैं।

यह कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्हें अपने प्रीमियम प्रोडक्ट लाइन्स पर मार्जिन बनाए रखना होगा, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने कोर कस्टमर बेस को न खोएं, जो अभी भी कम कीमत वाले, मास-मार्केट प्रोडक्ट्स पर निर्भर करता है। बड़ी कंज्यूमर कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे इस दोहरी रणनीति को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती हैं।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

हालांकि भारत में हाई-स्पेंडिंग आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन 2036 तक अमेरिका 23.1 करोड़ (231 मिलियन) अमीर लोगों के साथ सबसे बड़ा मार्केट बना रहेगा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए, लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्शन कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है। निवेशकों का तत्काल फोकस तिमाही नतीजों पर बना रहना चाहिए। ट्रैक करने योग्य मुख्य क्षेत्रों में प्रीमियम बनाम मास-मार्केट प्रोडक्ट लाइन्स की ग्रोथ रेट, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनियों की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता, और शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कंज्यूमर डिमांड पैटर्न में बदलावों पर मैनेजमेंट की टिप्पणी शामिल है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.