सरकार ने चांदी के गहनों और आर्टिफैक्ट्स के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने का फैसला लिया है, जो अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। इस कदम का मकसद शुद्धता को लेकर हो रही धांधली पर लगाम लगाना है।
नियम और मानक
Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा लाए गए इस नए नियम के तहत, देश में बिकने वाली हर चांदी की वस्तु पर BIS मार्क, 'SILVER' शब्द, शुद्धता का ग्रेड और 6-डिजिट का हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) कोड होना अनिवार्य होगा। अब तक 2005 से चांदी पर हॉलमार्किंग स्वैच्छिक थी, लेकिन अब इसे सोने की तरह ही कड़े फ्रेमवर्क में लाया जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
इस बदलाव में सबसे बड़ी चुनौती टेस्टिंग सेंटर्स की उपलब्धता है। अगस्त 2026 तक केवल 341 BIS-मान्यता प्राप्त सेंटर (AHC) उपलब्ध हैं, जबकि सोने के लिए यह संख्या 1,600 से ज्यादा है। छोटे और ग्रामीण इलाकों के ज्वेलर्स के लिए अपनी इन्वेंट्री की टेस्टिंग कराना बड़ी लॉजिस्टिक समस्या बन सकता है।
रिटेलर्स पर असर
यह mandate बाजार में संगठित (organized) और असंगठित (unorganized) खिलाड़ियों के बीच एक स्पष्ट लकीर खींच देगा। बड़ी ज्वेलरी चेन के पास पहले से ही सोना हॉलमार्किंग की प्रक्रिया मौजूद है, इसलिए वे आसानी से ढल जाएंगी। वहीं, छोटे दुकानदारों पर कंप्लायंस की लागत बढ़ सकती है।
दंडात्मक कार्रवाई और निवेश पर नजर
BIS एक्ट, 2016 के उल्लंघन पर सामान की कीमत का 5 गुना तक जुर्माना या 1 साल तक की जेल हो सकती है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि BIS कितनी तेजी से नए टेस्टिंग सेंटर खोलता है, क्योंकि यदि छोटे दुकानदारों को समस्या हुई, तो रीजनल सप्लाई चेन में अस्थाई दिक्कतें आ सकती हैं।
