भारत सरकार अगले **30 दिनों** के भीतर क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के लिए एक नई रणनीतिक स्टॉकपाइलिंग नीति लाने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे जरूरी खनिजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।
सुरक्षा का नया चक्रव्यूह
नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत सरकार अब एक ऐसा 'बफर स्टॉक' तैयार करने जा रही है, जो ठीक वैसा ही काम करेगा जैसे ऊर्जा सुरक्षा के लिए देश के पास रणनीतिक तेल भंडार हैं। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों का यह स्टॉक डिफेंस, एयरोस्पेस, क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम सेक्टरों को ग्लोबल सप्लाई चेन के झटकों से बचाएगा।
चार राज्यों में खुलेंगे प्रोसेसिंग पार्क
सरकार ने केवल स्टॉक जमा करने की ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रोसेस करने की भी पूरी तैयारी कर ली है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र में 4 समर्पित प्रोसेसिंग पार्क बनाने की योजना है। इन हब्स का काम कच्चे माल की रिफाइनिंग करना होगा, जिससे देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी और विंड एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह पहल लंबी अवधि में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, लेकिन निवेशकों को जमीनी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुनियादी ढांचा खड़ा करना कैपिटल-इंटेंसिव काम है और इसमें लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) जैसी बाधाएं आ सकती हैं। साथ ही, ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में होने वाली उठा-पटक कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकती है। अब बाजार की नजरें नीति की बारीकियों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि प्राइवेट सेक्टर के लिए क्या इंसेंटिव्स और निवेश के मॉडल तय किए गए हैं।
