वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और World Bank के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत के बॉन्ड मार्केट को गहराई देने के लिए हाथ मिलाया है। अब प्राइवेट कैपिटल को लुभाने के लिए क्रेडिट गारंटी का सहारा लिया जाएगा, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज सस्ता होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और World Bank ग्रुप के प्रेसिडेंट अजय बंगा की मुलाकात ने भारत की आर्थिक नीति में एक बड़ा बदलाव संकेत दिया है। G20 मीटिंग के दौरान हुई इन बातचीत का मुख्य जोर पारंपरिक कर्ज के बजाय अब 'प्राइवेट कैपिटल' को मार्केट के जरिए जुटाने पर है।
कैसे बदलेगा बॉन्ड मार्केट?
इस रणनीति का केंद्र कॉर्पोरेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को विकसित करना है। इसके लिए World Bank की संस्था MIGA (Multilateral Investment Guarantee Agency) का इस्तेमाल किया जाएगा। MIGA राजनीतिक जोखिम बीमा और क्रेडिट एन्हांसमेंट (Credit Enhancement) मुहैया कराएगी। आसान भाषा में कहें तो यह एक बैकस्टॉप की तरह काम करेगी, जिससे इन बॉन्ड्स को खरीदना निवेशकों के लिए ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक हो जाएगा।
सरकारी और निजी कंपनियों को फायदा
मौजूदा समय में म्युनिसिपल बॉन्ड सेक्टर में लिक्विडिटी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इन गारंटी स्ट्रक्चर्स के जरिए कंपनियां और म्युनिसिपैलिटियां सीधे बाजार से पैसा जुटा सकें, न कि केवल बैंकों के लोन पर निर्भर रहें। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में सीधी कमी आने की उम्मीद है।
डिजिटल और टूरिज्म पर भी नजर
बॉन्ड मार्केट के अलावा, यह पार्टनरशिप 'ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज हब' पर भी काम करेगी। साथ ही, International Finance Corporation (IFC) के जरिए टूरिज्म सेक्टर और Small Industries Development Bank of India (SIDBI) के साथ मिलकर सूक्ष्म उद्योगों (MSMEs) को भी बड़े स्तर पर फंडिंग दी जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए निवेश का एक नया रास्ता खोल सकता है। हालांकि, क्रेडिट गारंटी स्ट्रक्चर कितना सफल होता है, यह आने वाले समय में $1.5 बिलियन के डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग पैकेज के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। बाजार की चाल अभी भी ब्याज दरों और महंगाई जैसे मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स के प्रति संवेदनशील बनी रहेगी, इसलिए निवेशकों को नई बॉन्ड इश्यून्स के वॉल्यूम पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
