भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। सरकार RoDTEP स्कीम को अगले **5 साल** के लिए आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है, जिसके लिए फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में **₹23,000 करोड़** के बजट का प्रस्ताव रखा गया है।
भारत सरकार अपनी प्रमुख एक्सपोर्ट सपोर्ट स्कीम, 'रिमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेस ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स' (RoDTEP) को 30 सितंबर, 2026 की डेडलाइन के बाद भी 5 साल के लिए और विस्तार देने की योजना बना रही है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹23,000 करोड़ के फंड की मांग की है।\n\n### यह स्कीम क्यों है जरूरी?\n\nRoDTEP स्कीम भारतीय निर्यातकों के लिए एक लाइफलाइन की तरह है। यह निर्यातकों को फ्यूल, बिजली के बिल और मंडी शुल्क जैसे स्थानीय टैक्सेस पर रिफंड देती है, जो मैन्युफैक्चरिंग के दौरान लागत में जुड़ जाते हैं। इस रिफंड से भारतीय सामान ग्लोबल मार्केट में अधिक कॉम्पिटिटिव और सस्ता बन जाता है।\n\n### एक्सपोर्टर्स को मिलेगा बड़ा फायदा\n\nइस लंबे विस्तार से टेक्सटाइल, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर की कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक बार-बार छोटे एक्सटेंशन मिलने से एक्सपोर्टर्स में अनिश्चितता का माहौल रहता था। 5 साल का लंबा समय मिलने से कंपनियां अपनी प्रोडक्शन और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी को बेहतर तरीके से प्लान कर सकेंगी। ग्लोबल ट्रेड में अस्थिरता और फ्रेट कॉस्ट के उतार-चढ़ाव के बीच यह स्टेबिलिटी एक्सपोर्टर्स के प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।\n\n### निवेशकों के लिए जरूरी बातें\n\nहालांकि योजना सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की अंतिम मंजूरी पर नजर रखनी चाहिए। सरकार बजट की स्थिति और ट्रेड डेटा के आधार पर स्कीम की दरों या पात्रता (Eligibility) में बदलाव कर सकती है। फिलहाल एक्सपोर्टर्स को आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार है, जिससे साफ होगा कि इस बार टैक्स रिमिशन रेट्स क्या रहेंगे और इसमें कौन से नए प्रोडक्ट्स को शामिल किया गया है।
