भारत के पूर्वी राज्यों में भारी बारिश और राजस्थान में हीटवेव के कारण आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। निवेशकों को एग्रीकल्चर, सप्लाई चेन और पावर ग्रिड से जुड़ी कंपनियों पर नज़र रखनी चाहिए।
कृषि और सप्लाई चेन पर संकट
मौसम विभाग (IMD) ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में विपरीत जलवायु स्थितियों को दर्शाते हैं। ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गुजर रहा 'डीप डिप्रेशन' भारी बारिश और तेज हवाएं ला रहा है, जबकि पश्चिमी राजस्थान 43.6 डिग्री सेल्सियस जैसे भीषण तापमान का सामना कर रहा है।
सितंबर का महीना खेती के लिए बेहद अहम है। छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे फसल की गुणवत्ता खराब होने का डर है। जो कंपनियां एग्री-इनपुट्स, वेयरहाउसिंग और रूरल सप्लाई चेन से जुड़ी हैं, उन्हें लॉजिस्टिक्स में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर ग्रिड की चुनौती
शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में जलभराव के कारण पावर ग्रिड की स्थिरता पर असर पड़ सकता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और रिटेल सेंटर्स का कामकाज प्रभावित हो सकता है। वहीं, राजस्थान में भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग में भारी उछाल आया है, जिससे पावर यूटिलिटीज पर दबाव बढ़ गया है। अधिक तापमान से कोल्ड-स्टोरेज और तापमान-संवेदनशील लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अगले कुछ दिनों में मौसम प्रणाली कितनी जल्दी शांत होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। खासकर ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक बेल्ट में काम करने वाली कंपनियों के डिस्क्लोजर पर नजर रखें। IMD के अपडेट्स के साथ-साथ एग्रीकल्चर और लॉजिस्टिक्स कंपनियों की कमेंट्री यह तय करेगी कि यह असर कितना अस्थायी है और रिकवरी में कितना समय लगेगा।
