FY2026 में भारत और वियतनाम के बीच कुल व्यापार **$18.3 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते आयात के कारण ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर **$4.9 बिलियन** हो गया है।
भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार का आंकड़ा $18.3 बिलियन तक पहुंच गया है। इस ग्रोथ के बावजूद एक गंभीर चुनौती सामने है—ट्रेड डेफिसिट का $4.9 बिलियन तक पहुंचना, जो पिछले साल की तुलना में 7 गुना ज्यादा है।
आयात में तेजी की मुख्य वजह
पिछले 4 वर्षों में जहां द्विपक्षीय व्यापार में 7% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ देखी गई है, वहीं वियतनाम से भारत का आयात 12% की सालाना रफ्तार से बढ़कर $11.6 बिलियन हो गया है। भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग जरूरतों के लिए वियतनाम अब एक प्रमुख सप्लायर बन चुका है। भारत वहां से फ्लैट-पैनल डिस्प्ले, कंप्यूटिंग पेरिफेरल्स और टेलीकॉम इक्विपमेंट जैसे जरूरी पुर्जे मंगवा रहा है, जो घरेलू असेंबली के लिए बेहद अहम हैं।
निर्यात में बदलाव
भारत अब पुराने ढर्रे से हटकर अपने निर्यात पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रहा है। लोहे और स्टील पर निर्भरता कम हो रही है, जबकि फ्रोजन बोवाइन मीट, एल्युमिनियम और समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ रहा है।
2030 तक का लक्ष्य
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $25 बिलियन से $30 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। मई 2026 में हुए 'Enhanced Comprehensive Strategic Partnership' के जरिए लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अब निवेशकों की नजर इस पर है कि क्या भारत अपने वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट्स को बढ़ाकर इस व्यापार असंतुलन को कम कर पाएगा।
