भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। समुद्री रास्तों पर बढ़ते तनाव से खाद्य, ईंधन और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा संकट
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने स्पष्ट किया है कि लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों का 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए घातक साबित हो रहा है। समुद्री रास्तों में आ रही बाधाओं के कारण फ्यूल, फर्टिलाइजर और खाद्य सामग्री की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
2027 तक गहरा सकता है खाद्य संकट
जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) जैसे बड़े ग्लोबल वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो साल 2027 तक दुनिया एक बड़े खाद्य संकट का सामना कर सकती है। भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिकूल मौसमी स्थितियों के कारण भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो जिन कंपनियों का कच्चा माल मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है, उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
- बढ़ते खर्च: समुद्री रास्ते बदलने और असुरक्षा के कारण फ्रेट इंश्योरेंस और ट्रांजिट कॉस्ट में भारी उछाल आ सकता है।
- मुनाफे पर चोट: जो कंपनियां इन बढ़ते लॉजिस्टिक खर्चों को ग्राहकों पर नहीं डाल पाएंगी, उनके नेट प्रॉफिट में गिरावट देखी जा सकती है।
भारत अब अपनी निर्भरता कम करने के लिए 'नदरन सी रूट' (Northern Sea Route) जैसे विकल्पों को तलाश रहा है, लेकिन फिलहाल के लिए ग्लोबल फ्रेट इंडेक्स और फर्टिलाइजर की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
