गृह मंत्रालय ने 'Immigration and Foreigners (Exemption) (Amendment) Order, 2026' जारी किया है। इसके तहत शरणार्थी समूहों और नेपाल-भूटान के बीच यात्रा नियमों को सरल बनाया गया है। यह पूरी तरह से एक प्रशासनिक नीति है, जिसका शेयर बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत सरकार ने 5 नवंबर, 2026 से प्रभावी होने वाला 'Immigration and Foreigners (Exemption) (Amendment) Order, 2026' अधिसूचित कर दिया है। इस नीतिगत बदलाव का उद्देश्य विदेशी नागरिकों, शरणार्थियों और क्षेत्रीय यात्रियों के लिए डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रिया को आसान बनाना है, साथ ही सीमा सुरक्षा को और पुख्ता करना है।
शरणार्थियों के लिए राहत के नियम
संशोधन के तहत भारत में रह रहे विशिष्ट समूहों को राहत दी गई है। 31 दिसंबर, 2009 तक भारत आए पाकिस्तानी नागरिक जिनके पास 'Computerised National Identity Card' नहीं है, उन्हें पासपोर्ट रिन्यूअल की शर्तों से छूट दी जा सकती है। इसके लिए कड़े पात्रता मानदंड तय किए गए हैं, जिसमें सुरक्षित रिकॉर्ड और पाकिस्तान में संपत्ति न होने की पुष्टि अनिवार्य है।
इसके अलावा, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—जो 31 दिसंबर, 2024 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उनके लिए रहने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया गया है। साथ ही, श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों और तिब्बती नागरिकों के पंजीकरण प्रोटोकॉल को भी औपचारिक रूप दिया गया है।
क्षेत्रीय और सैन्य यात्रा में बदलाव
नए नियमों के अनुसार, भारत, नेपाल और भूटान के नागरिक अब बिना पासपोर्ट के चुनिंदा पहचान पत्रों के जरिए इन देशों के बीच यात्रा कर सकेंगे। हालांकि, यह छूट चीन, पाकिस्तान या मकाऊ के रास्ते यात्रा करने पर लागू नहीं होगी, जहां मानक पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य बने रहेंगे। साथ ही, सरकारी ड्यूटी पर तैनात भारतीय सशस्त्र बलों और विदेशी सैन्य क्रू (शिप रिपेयर के लिए आने वाले) के लिए भी प्रशासनिक छूट का प्रावधान किया गया है।
निवेशकों के लिए स्पष्टीकरण
जो निवेशक बाजार की चाल पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह एक सामाजिक और प्रशासनिक नीति है। इसका किसी भी लिस्टेड कंपनी के बिजनेस, मुनाफे, या फाइनेंशियल आउटलुक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
