अगस्त 2026 में भारत की बेरोजगारी दर सुधरकर **5%** पर आ गई है। ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट के दबाव के चलते घरेलू शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
देश के लेबर मार्केट के लिए अगस्त महीना काफी राहत भरा रहा है। बेरोजगारी दर पिछले महीने के 5.1% से घटकर 5% पर आ गई है, जो पिछले 6 महीनों का निचला स्तर है। इस सुधार के पीछे सबसे बड़ा हाथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का है, जहां अनइंप्लॉयमेंट रेट गिरकर 4.1% पर आ गया है, जो 8 महीने का सबसे निचला स्तर है।
शहरी बाजार पर दबाव
ग्रामीण इलाकों में भले ही स्थिति बेहतर हुई हो, लेकिन शहरों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अगस्त में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 6.8% पहुंच गई है, जो 5 महीनों का उच्चतम स्तर है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट बढ़कर 55.6% हो गया है और वर्कर पॉप्युलेशन रेशियो 52.8% के स्तर पर पहुंच गया है, जो मार्च 2026 के बाद सबसे ज्यादा है।
बाजार में मायूसी क्यों?
रोजगार के ये अच्छे आंकड़े बाजार को खुश करने में नाकाम रहे। 15 सितंबर, 2026 को Sensex और Nifty 50 दोनों ही इंडेक्स लगभग 2% नीचे बंद हुए। निवेशकों ने डेटा के बजाय ग्लोबल चिंताओं पर ज्यादा ध्यान दिया। बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और US Federal Reserve द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका ने सेंटीमेंट खराब कर दिए। इसका असर करेंसी मार्केट पर भी दिखा और रुपया 1 महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि India VIX में 10% से ज्यादा का उछाल देखा गया।
