पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल आयात का बचाव किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब 'Lindsey Graham Act 2026' के तहत अमेरिका से रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने का जोखिम बढ़ गया है।
पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल का आयात बेहद जरूरी है। 11 अक्टूबर 2026 को उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आयातों में जबरन कटौती की गई, तो न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ेगी, बल्कि ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं।
ट्रेड बातचीत में क्यों आया ठहराव?
नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव साफ दिख रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने स्वीकार किया है कि औपचारिक बातचीत फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। मुख्य समस्या टैरिफ स्ट्रक्चर और ड्यूटी फ्रेमवर्क को लेकर सहमति न बन पाना है।
नए कानून का जोखिम
स्थिति को और जटिल बना दिया है हाल ही में पारित 'Lindsey Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' ने। यह कानून अमेरिका को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है जो रूसी ऊर्जा आयात जारी रखते हैं। श्रृंगला के अनुसार, यह खतरा और अमेरिका द्वारा 'सेक्शन 301' के तहत की जा रही लेबर और इंडस्ट्रियल कैपेसिटी की जांच, भारत के लिए लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक प्लानिंग में बाधा बन रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारत और चीन के संबंधों पर भी चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में सैन्य डिसइंगेजमेंट के बावजूद आर्थिक भागीदारी का रास्ता अभी कठिन है। फिलहाल, भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी ट्रेड पर निर्भर सेक्टरों के लिए अनिश्चितता का दौर जारी है। बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या राजनयिक स्तर पर ये विवाद सुलझ पाएंगे या अमेरिका अपनी टैरिफ नीति पर सख्ती से आगे बढ़ेगा।
