वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal और US Trade Representative Jamieson Greer के बीच Milwaukee में व्यापार समझौतों को लेकर बातचीत शुरू हो गई है। रूस से तेल आयात पर नए अमेरिकी कानूनों और ट्रेड इंवेस्टिगेशन के चलते भारतीय एक्सपोर्ट-हैवी सेक्टरों के लिए पॉलिसी अनिश्चितता बढ़ गई है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal इस हफ्ते Milwaukee में हैं, जहां वे US Trade Representative Jamieson Greer के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कर रहे हैं। ये चर्चाएं G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की मीटिंग के साथ चल रही हैं, जिसका मुख्य मकसद एक संभावित अंतरिम डील की राह तलाशना है। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल भारतीय उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
अमेरिकी कानून और रूसी तेल का पेच
बातचीत का सबसे बड़ा रोड़ा 18 सितंबर से लागू हुआ 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' है। इस नए कानून के तहत, रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक के टैरिफ लगाए जा सकते हैं। चूंकि भारत रूसी क्रूड का एक बड़ा खरीदार है, इसलिए यह द्विपक्षीय व्यापार में सीधे टकराव का मुद्दा बन गया है।
रेगुलेटरी अनिश्चितता और ट्रेड बैरियर्स
ऊर्जा से जुड़े तनाव के अलावा, फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी व्यापार ढांचे को जटिल बना दिया है। अमेरिका ने अब कई इंडस्ट्रीज में 'स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी' को लेकर Section 301 के तहत जांच शुरू की है। अक्सर ऐसी जांच के बाद नए ट्रेड बैरियर्स या ड्यूटीज लगाई जाती हैं। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स से जुड़े भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए यह अनिश्चितता का माहौल है, जो अमेरिकी बाजार तक उनकी पहुंच को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
भारत के एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टरों के लिए इन वार्ताओं का नतीजा बेहद अहम है। बाजार अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या दोनों देश इन बाधाओं को पार कर कोई साझा ढांचा तैयार कर पाते हैं। निवेशकों को टैरिफ छूट या ट्रेड प्रैक्टिस से जुड़े आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं से तय होगा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स की प्रतिस्पर्धात्मकता कितनी सुरक्षित रहती है।
