वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कर दिया है कि आगामी India-US ट्रेड डील में भारतीय किसानों और स्थानीय उद्योगों के हितों का खास ख्याल रखा जाएगा। फिलहाल यह समझौता लीगल ड्राफ्टिंग के फेज में है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ISID-IDRA के चौथे नेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया है कि आगामी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय किसानों और प्रमुख स्टेकहोल्डर्स की आजीविका की रक्षा करना होगा। सरकार किसी भी कीमत पर घरेलू हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है।\n\n### डील की मौजूदा स्थिति\nसमझौते की लीगल ड्राफ्टिंग का काम 15 अक्टूबर से चल रहा है। सरकार की यह रणनीति पिछले एक दशक में बदले हुए ट्रेड पॉलिसी अप्रोच को दर्शाती है। भारत अब RCEP जैसे मल्टीलेटरल ट्रेडिंग ब्लॉक्स से दूरी बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार में सीधे प्रतिस्पर्धा का जोखिम न बढ़े, जिससे स्थानीय प्रोडक्शन पर बुरा असर पड़ सकता है।\n\n### मार्केट एक्सेस पर सरकार का फोकस\nसरकार अब उन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (Bilateral Trade Deals) पर जोर दे रही है जिनकी अर्थव्यवस्था विकसित है। डेटा के अनुसार, भारत ने 9 बड़े समझौतों के जरिए 38 विकसित देशों तक अपनी पहुंच बनाई है। इससे भारतीय एक्सपोर्ट्स को उन मार्केट्स तक एक्सेस मिला है, जिनका कुल GDP $60 ट्रिलियन है, जो 2014 से पहले केवल $10 ट्रिलियन था।\n\n### निवेशकों के लिए संकेत\nयह नीति उन भारतीय व्यवसायों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जो टेक्सटाइल्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में काम करते हैं। सरकार की रणनीति साफ है—बाजार को विकसित देशों के लिए खोलना, लेकिन घरेलू कृषि और विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) को सुरक्षा कवच प्रदान करना। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि फाइनल एग्रीमेंट में किन स्पेसिफिक सेक्टर्स को प्राथमिकता मिलती है।
