भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील बातचीत के अंतिम चरण में है, लेकिन निवेशकों की नजरें अमेरिका के उस **10 दिन** के अल्टीमेटम पर हैं, जिसमें **2026 Act** के तहत एनर्जी सैंक्शन (Sanctions) का फैसला लिया जाना है।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने पुष्टि की है कि डील का मूल ढांचा तैयार है, लेकिन हालिया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद इसमें कुछ बदलाव करने पड़ रहे हैं। अगर यह डील सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो टेक्नोलॉजी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
एनर्जी सैंक्शन का रिस्क
ट्रेड डील के साथ-साथ एक बड़ा रिस्क 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' को लेकर पैदा हो गया है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार है, जो रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हैं। इस पर फैसला अगले 10 दिनों के भीतर अपेक्षित है।
इन शेयरों पर रखें नजर
यह घटनाक्रम भारतीय एनर्जी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विशेष रूप से:
- Indian Oil Corporation (IOCL)
- Bharat Petroleum (BPCL)
- Hindustan Petroleum (HPCL)
- Reliance Industries
इन कंपनियों ने लागत कम करने के लिए रूसी तेल पर काफी हद तक निर्भरता बढ़ाई है। यदि अमेरिका बिना किसी छूट (Waiver) के ये सैंक्शन लागू करता है, तो सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इससे कंपनियों को महंगे विकल्प तलाशने होंगे, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। बाजार अब भारत सरकार की ओर से आने वाले किसी भी आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहा है, जो यह स्पष्ट करेगा कि क्या हमें ऊर्जा आपूर्ति लाइनों पर कोई राहत मिलेगी या नहीं।
