US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio ने भारत के साथ होने वाली ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के संकेत दिए हैं। इस एग्रीमेंट का मुख्य लक्ष्य बिजनेस में स्थिरता लाना है, जिसमें एनर्जी सप्लाई और स्मॉल मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर्स पर खास फोकस रहेगा।
अमेरिका और भारत एक ऐसे द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट के अंतिम दौर में हैं, जो दोनों देशों के बिजनेस माहौल को और अधिक स्थिर बनाएगा। US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio के अनुसार, बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। भारतीय कंपनियों और निवेशकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बार-बार होने वाले टैरिफ बदलावों से मिलने वाली अनिश्चितता कम होगी।\n\n### एनर्जी और न्यूक्लियर सेक्टर पर फोकस\nइस पार्टनरशिप का एक अहम हिस्सा एनर्जी सिक्योरिटी है। अमेरिका ने भारत को क्रूड ऑयल इम्पोर्ट के लिए वेस्टर्न हेमिस्फियर (जैसे अमेरिका और वेनेजुएला) की ओर रुख करने को प्रोत्साहित किया है। इससे भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर की लॉजिस्टिक्स और प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, स्मॉल मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर्स के जरिए सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं।\n\n### वीजा और डिफेंस पर अपडेट\nIT सेक्टर के लिए H-1B वीजा नीति एक बड़ा पॉइंट बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये सुधार घरेलू वर्कर्स की सुरक्षा के लिए हैं। वहीं, डिफेंस फ्रंट पर F-35 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल और 'Quad' एलायंस के जरिए समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस डील की शर्तों और टैरिफ स्ट्रक्चर पर बनी रहेगी।
