कॉमर्स मिनिस्टर पियूष गोयल ने साफ कर दिया है कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील केवल तभी करेगा, जब उसे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले टैरिफ में बढ़त मिले। अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच भारत का एक्सपोर्ट ग्रोथ **$317 बिलियन** तक पहुंच गया है।
भारत सरकार ने अपनी ट्रेड पॉलिसी पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी द्विपक्षीय समझौते (Bilateral Trade Agreement) के लिए 'टैरिफ एडवांटेज' सबसे जरूरी है। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पियूष गोयल ने 3 सितंबर, 2026 को स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ डील साइन करने की जल्दी में नहीं है। मुख्य फोकस इस बात पर है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को वियतनाम, बांग्लादेश और थाईलैंड जैसे देशों की तुलना में बेहतर प्राइसिंग एज मिले, जो अब तक अपने ट्रेड पैक्ट्स के जरिए ग्लोबल मार्केट में बढ़त बनाए हुए हैं।
निर्यात में जोरदार उछाल
भारत का एक्सपोर्ट प्रदर्शन इस समय काफी मजबूत बना हुआ है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच मर्चेंडाइज और सर्विसेज को मिलाकर कुल निर्यात करीब $317 बिलियन तक पहुंच गया है, जो 2025 की समान अवधि के $280 बिलियन से काफी अधिक है। सरकार अपने $1 ट्रिलियन सालाना एक्सपोर्ट टारगेट को हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है।
डील की राह में चुनौतियां
हालांकि, डील का रास्ता अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फरवरी 2026 में ट्रेड फ्रेमवर्क की घोषणा के बाद से बातचीत में कुछ देरी देखी गई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टरों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है। इसके अलावा, अमेरिका की ओर से एनर्जी ट्रेड और वीजा पॉलिसी जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा चल रही है।
अब सबकी नजरें सितंबर 2026 के अंत में मिल्वौकी में होने वाली G20 ट्रेड मिनिस्टीरियल मीटिंग पर टिकी हैं, जहां पियूष गोयल के द्विपक्षीय बातचीत करने की उम्मीद है।
