India-US Strategic Ties: रक्षा और IT में बढ़ी दोस्ती, पर ट्रेड पर मंडराया नए प्रतिबंधों का खतरा

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AuthorMehul Desai|Published at:
India-US Strategic Ties: रक्षा और IT में बढ़ी दोस्ती, पर ट्रेड पर मंडराया नए प्रतिबंधों का खतरा

भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन ट्रेड बातचीत ठप होने और नए अमेरिकी सैंक्शन कानूनों से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया बातचीत के बाद डिफेंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और फार्मा सेक्टर में सहयोग के नए रास्ते खुले हैं।

डिफेंस और टेक्नोलॉजी में तेजी

राजस्थान में आयोजित Exercise Tarang Shakti जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देश मिलिट्री इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। वहीं, फार्मा सेक्टर में भारत का अमेरिका को जेनेरिक दवाओं की सप्लाई जारी है, जो अमेरिकी हेल्थकेयर सप्लाई चेन का एक प्रमुख आधार बना हुआ है।

ट्रेड में रुकावट और बड़ा जोखिम

राजनयिक स्तर पर प्रोग्रेस के बावजूद, ट्रेड नेगोशिएशंस फिलहाल एक ठहराव (plateau) पर पहुंच गए हैं। मुख्य विवाद ट्रेड इंबैलेंस, टैरिफ स्ट्रक्चर और भारत की एनर्जी इंपोर्ट पॉलिसी को लेकर है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' है। इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकता है जो रूस से एनर्जी इंपोर्ट जारी रखते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

भले ही IT और फार्मा जैसे सेक्टर में डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन टैरिफ का खतरा कॉस्ट प्रेशर और पॉलिसी अनिश्चितता को बढ़ा रहा है। बाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी और ट्रेड पार्टनरशिप के बीच कोई बीच का रास्ता निकाल पाता है या टैरिफ छूट को लेकर कोई नई घोषणा होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.