India-UN Development Partnership Fund ने **64** देशों में **94** प्रोजेक्ट्स पर **$8.2 करोड़** का निवेश किया है। इस पहल से न केवल डिप्लोमैटिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए नए उभरते बाजारों के रास्ते भी खुल रहे हैं।
भारत अब ग्लोबल साउथ में अपनी आर्थिक कूटनीति (Economic Diplomacy) को एक नई दिशा दे रहा है। India-UN Development Partnership Fund के जरिए भारत ने कुल $15 करोड़ का वादा किया है, जिसमें से अब तक $8.2 करोड़ का इस्तेमाल 64 देशों में 94 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए किया जा चुका है।\n\n### भारतीय कंपनियों के लिए क्या हैं अवसर?\nइस फंड का मुख्य उद्देश्य उन देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और कैपेसिटी-बिल्डिंग पर जोर देना है, जहां विकास की अपार संभावनाएं हैं। यह पहल भारतीय कंपनियों के लिए एक 'गेटवे' की तरह काम कर रही है। आने वाले समय में इंजीनियरिंग, टेलीकॉम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फार्मा सेक्टर की भारतीय कंपनियों के लिए इन देशों में अपनी सेवाएं और प्रोडक्ट्स पहुंचाने का रास्ता आसान हो सकता है।\n\n### डिप्लोमेसी और बिजनेस का मेल\nइस फंड की सबसे खास बात यह है कि भारत विकास कार्यों में किसी भी तरह की सख्त शर्तें नहीं थोपता। यह 'सॉवरेन' (Sovereign) मॉडल recipient देशों को अपने प्रोजेक्ट खुद नियंत्रित करने की आजादी देता है, जिसे UN में भी काफी सराहा गया है।\n\nUN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश का कहना है कि अब यह फंड अपने दूसरे चरण में है, जहां प्रोजेक्ट्स को सस्टेनेबल बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। जैसे-जैसे ये प्रोजेक्ट्स मैच्योर होंगे, भारत की उपस्थिति और भी मजबूत होगी, जिसका सीधा फायदा भविष्य में भारतीय व्यापार को मिलने की उम्मीद है।
