नई दिल्ली में हुई 16वीं India-UK JETCO मीटिंग के बाद व्यापारिक रिश्तों में बड़ी हलचल दिखी है। CETA के तहत **£1 बिलियन** यानी करीब **₹12,500 करोड़** के नए कमर्शियल डील्स साइन किए गए हैं, जो भविष्य में IT, AI और इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक रिश्तों में नई गति देखने को मिली है। 12 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं India-UK JETCO मीटिंग में यूके के बिजनेस सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स और 100 से ज्यादा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने £1 बिलियन (करीब ₹12,500 करोड़) के नए पार्टनरशिप समझौतों पर मुहर लगाई है। यह कदम 15 जुलाई, 2026 से लागू हुए CETA (Comprehensive Economic and Trade Agreement) को जमीनी स्तर पर उतारने की कोशिश है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?\n\nCETA का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत के 99% एक्सपोर्ट्स पर अब जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग लागत कम होगी। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो AI, एविएशन, हेल्थकेयर और एडवांस इंजीनियरिंग में काम कर रही हैं। \n\nIT और इंजीनियरिंग स्पेस में TCS, Infosys और Hexaware जैसी कंपनियां इस डिजिटल और साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके अलावा, RPSG Group का मैनचेस्टर ओरिजिनल्स क्रिकेट फ्रैंचाइजी में निवेश यह दर्शाता है कि स्पोर्ट्स और कमर्शियल वेंचर्स में भी बड़े मौके बन रहे हैं।\n\n### भविष्य की चुनौतियां\n\nहालाँकि शुरुआत अच्छी रही है, लेकिन निवेशकों को 'नॉन-टैरिफ बैरियर्स' पर नजर रखनी होगी। खासकर Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) के नियम भारतीय औद्योगिक सामानों के एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, MSME सेक्टर के लिए इन स्टैंडर्ड्स को मीट करना एक बड़ा चैलेंज बना हुआ है। \n\nआने वाले समय में दोनों सरकारें CETA यूटिलाइजेशन का सालाना डेटा साझा करेंगी, जिससे यह पता चलेगा कि इस व्यापारिक समझौते का असर कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर कितना पड़ रहा है।
