16वीं India-UK JETCO बैठक में **£1 बिलियन** से अधिक के नए कमर्शियल समझौते हुए हैं। जुलाई 2026 में लागू हुए India-UK CETA के बाद, एविएशन और AI जैसे सेक्टर में निवेश की बहार आई है, जिससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य और करीब आ गया है।
नई दिल्ली में आयोजित 16वीं India-UK Joint Economic and Trade Committee (JETCO) बैठक के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और यूके बिजनेस सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में £1 बिलियन से ज्यादा के नए कमर्शियल एग्रीमेंट्स पर मुहर लगी है। 15 जुलाई 2026 को India-UK CETA के लागू होने के बाद यह पहला बड़ा कदम है, जिसमें 100 से ज्यादा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रमुख निवेश और सेक्टर
इस ट्रेड सर्ज का मुख्य केंद्र स्ट्रेटेजिक कॉर्पोरेट कमिटमेंट्स हैं:
- Menzies Aviation: कंपनी भारत में अपने विस्तार पर बड़ा दांव लगा रही है, जिसका लक्ष्य £600 मिलियन से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना है। कंपनी प्रमुख एयरपोर्ट हब पर अपना परिचालन बढ़ाएगी।
- Meta for Data Technologies (MFD): टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस कंपनी ने यूके में AI रिसर्च के लिए £50 मिलियन का फंड देने का ऐलान किया है।
मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत
बैठक में भारत की दीर्घकालिक मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत खुद को यूरोपीय ऑटोमोटिव उत्पादकों के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। यूरोप में बढ़ती रेगुलेटरी लागत और पॉलिसी बाधाओं के बीच, भारत कोटा-बेस्ड टैरिफ रियायतों और एक स्टेबल मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क के जरिए ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि ये सौदे सेंटीमेंट के लिए पॉजिटिव हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि CETA का सफल होना इस पर निर्भर करेगा कि दोनों देश लेबर मोबिलिटी और रेगुलेटरी बाधाओं को कितनी जल्दी दूर करते हैं। निवेशकों को अब आधिकारिक ट्रेड डेटा पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह देखा जा सके कि ये घोषणाएं वास्तव में धरातल पर निवेश के रूप में कितनी उतरती हैं।
