भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने **100 अरब डॉलर** का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। साल **2022** में लागू हुई Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) की बदौलत दोनों देशों के बीच एनर्जी, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में रिश्ते और मजबूत हुए हैं।
भारत और UAE ने एक बड़ा आर्थिक मुकाम हासिल किया है। 2022 में लागू हुई CEPA डील ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम कर निवेश का रास्ता साफ कर दिया है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और UAE के डिप्टी पीएम शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात के दौरान इस उपलब्धि पर मुहर लगाई गई।
एनर्जी सिक्योरिटी और सप्लाई चेन पर असर
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए UAE कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर का अहम सप्लायर है। इस व्यापारिक रिश्ते के गहराने से भारत को इन जरूरी कमोडिटीज की सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जिससे महंगाई और इंडस्ट्रियल आउटपुट पर सकारात्मक असर पड़ेगा। एक अहम बदलाव 'डोमेस्टिक करेंसी सेटलमेंट फ्रेमवर्क' का लागू होना है, जिससे अब व्यापार रुपये और दिरहम में हो सकता है। इससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट और करेंसी रिस्क में कमी आई है।
निवेश का दायरा हुआ विस्तृत
अब दोनों देश केवल कमोडिटी ट्रेडिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टेक्नोलॉजी और डिफेंस जैसे सेक्टर्स में भी बड़े निवेश की तैयारी कर रहे हैं। लक्ष्य एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां रिसोर्सेज और नॉलेज का आदान-प्रदान हो। इससे आने वाले समय में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक प्रोजेक्ट्स में UAE से बड़ा कैपिटल इन्वेस्टमेंट देखने को मिल सकता है।
रिस्क मैनेजमेंट और चुनौतियां
ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, खासकर वेस्ट एशिया का तनाव, इस साझेदारी के लिए एक चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को इस कॉरिडोर की स्थिरता पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष से शिपिंग कॉस्ट बढ़ सकती है और सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है। भविष्य में मार्केट के लिए मुख्य मॉनिटरेबल पॉइंट द्विपक्षीय निवेश का इनफ्लो और लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम की कार्यक्षमता होगी।
