दिसंबर तिमाही के लिए भारत दुनिया का सबसे आशावादी लेबर मार्केट बनकर उभरा है। जहां **65%** कंपनियां विस्तार की योजना बना रही हैं, वहीं निवेशकों को बढ़ते हायरिंग खर्च और टैलेंट गैप के चलते कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव पर नजर रखनी होगी।
हायरिंग का नया दौर: स्किल्स पर जोर
ManpowerGroup Employment Outlook Survey के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए भारत का नेट एंप्लॉयमेंट आउटलुक 54% पर पहुंच गया है। कंपनियां सिर्फ कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ा रही हैं, बल्कि उनकी रणनीति में बदलाव आया है। सर्वे में शामिल लगभग 70% नियोक्ताओं ने कहा कि उनकी रिक्रूटमेंट प्लानिंग नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी है। फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में तो आउटलुक 60% तक जा पहुंचा है, वहीं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में पिछली तिमाही के मुकाबले 21 प्रतिशत अंक का जबरदस्त उछाल देखा गया है।
बाजार की हकीकत बनाम कंपनियों का भरोसा
एक तरफ तो हायरिंग का उत्साह है, लेकिन दूसरी ओर Nifty 50 और Sensex जैसे बेंचमार्क इंडेक्स पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इस विरोधाभास की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की तरफ से पूंजी की निकासी और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताएं बढ़ा रही हैं। कंपनियां तो विस्तार के मूड में हैं, लेकिन ग्लोबल दबाव के कारण बिजनेस की लागत (Cost of Business) लगातार बनी हुई है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
शेयरधारकों को इस बात पर गौर करना चाहिए कि 82% कंपनियों को कुशल टैलेंट खोजने में काफी मुश्किल हो रही है। जब सही टैलेंट नहीं मिलता, तो कंपनियों को या तो ज्यादा वेतन देना पड़ता है या ट्रेनिंग पर भारी खर्च करना होता है, जिसका सीधा असर ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ता है। आने वाले समय में फाइनेंस, इंश्योरेंस और IT सेक्टर के नतीजों में वेज इन्फ्लेशन के संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
