Ipsos Global Consumer Confidence Index के सितंबर **2026** के आंकड़ों में भारत ने दुनिया भर में पहला स्थान हासिल किया है। नौकरी और निवेश को लेकर बढ़ती सकारात्मकता ने भारतीय बाजार में घरेलू खपत (Domestic Consumption) की मजबूती को साबित कर दिया है।
भारत का कंज्यूमर सेंटीमेंट फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। सितंबर 2026 के लेटेस्ट Ipsos इंडेक्स में भारत ने 66.9 के स्कोर के साथ दुनिया में टॉप पोज़िशन हासिल की है। यह ग्लोबल एवरेज 48.4 से काफी बेहतर है और स्वीडन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है, जिनका स्कोर 60.0 रहा। यह उछाल दिखाता है कि पिछले महीने की मामूली गिरावट सिर्फ एक अस्थाई दौर था।
इस तेजी के पीछे क्या है कारण?
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर 'जॉब मार्केट' है। एंप्लॉयमेंट सब-इंडेक्स में 3.7 पॉइंट्स का बड़ा उछाल आया है, जो दिखाता है कि लोगों में अपनी नौकरी और नए अवसरों को लेकर विश्वास बढ़ा है। इसका सीधा असर रिटेल, बैंकिंग और FMCG सेक्टर पर पड़ने की उम्मीद है। साथ ही, इन्वेस्टमेंट सब-इंडेक्स भी 1.7 पॉइंट्स ऊपर गया है, जिसका मतलब है कि अब लोग बड़े खर्चों के लिए तैयार हो रहे हैं।
एक छोटा सा 'सावधानी' का संकेत
हालांकि सब कुछ पॉजिटिव नहीं है। नेशनल इकोनॉमिक एक्सपेक्टेशन सब-इंडेक्स में 0.3 पॉइंट्स की गिरावट दर्ज की गई है। यह बताता है कि लोग अपनी निजी फाइनेंशियल स्थिति को लेकर तो खुश हैं, लेकिन देश की व्यापक आर्थिक स्थिति को लेकर अभी भी थोड़े सतर्क हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
भारतीय बाजारों के लिए यह डेटा काफी मायने रखता है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल कंपनियों की सेल्स वॉल्यूम में ग्रोथ देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए सलाह है कि आने वाली तिमाही के नतीजों (Quarterly Results) पर नजर रखें, ताकि यह पता चल सके कि क्या यह कॉन्फिडेंस असल में कंपनियों के रिवेन्यू में बदल रहा है।
