Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने रोजगार सर्वे के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। जनवरी 2027 से शुरू होने वाले नए सर्वे में Gig Economy और घर के अनपेड काम को शामिल किया जाएगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिति की सटीक तस्वीर मिल सकेगी।
आंकड़ों में होगा बड़ा बदलाव
सरकार अब पुरानी ढर्रे की कार्यप्रणाली को छोड़कर आधुनिक भारत की जरूरतों के हिसाब से डेटा जुटाएगी। 2027-28 के सैंपलिंग पीरियड से MoSPI अपनी सर्वे मेथोडोलॉजी को पूरी तरह से अपग्रेड करने की तैयारी कर रहा है। अभी तक जो लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे डिलीवरी या राइड-हेलिंग) से जुड़े हैं, वे आधिकारिक आंकड़ों में सही तरीके से दर्ज नहीं हो पा रहे थे। नए फ्रेमवर्क में इनके लिए अलग से सवाल शामिल किए जाएंगे ताकि 'गिग इकोनॉमी' की सही संख्या पता चल सके।
क्यों है यह बदलाव जरूरी?
वर्तमान में भारत का बेरोजगारी दर का आंकड़ा लगभग 5% के आसपास बना रहता है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसमें करोड़ों ऐसे लोग छूट जाते हैं जो फ्रीलांस या प्लेटफॉर्म आधारित काम कर रहे हैं। इस सुधार के जरिए सरकार अब उस 'गैप' को खत्म करना चाहती है जो पुराने मानकों और जमीनी हकीकत के बीच बना हुआ है।
घरेलू कामकाज की भी होगी गिनती
सिर्फ Gig वर्क ही नहीं, बल्कि अब घरों में किए जाने वाले उन कामों को भी सर्वे में जगह दी जाएगी जो अभी तक आर्थिक गणना (Aggregate Output) का हिस्सा नहीं थे। इसमें देखभाल (Caregiving) और वॉलंटरी काम भी शामिल होंगे। इससे देश की नेशनल इनकम की गणना में व्यापकता आएगी और भविष्य की वेलफेयर स्कीम्स को बेहतर ढंग से डिजाइन किया जा सकेगा।
प्रशासन और भौगोलिक सुधार
सर्वे का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ सरकार प्रशासनिक सीमाओं (District Boundaries) और शहरी विस्तार को भी नए सैंपल में शामिल करेगी। इससे डेटा की रिलायबिलिटी बढ़ेगी और पुराने सर्वे में आने वाली तकनीकी दिक्कतें दूर होंगी। फिलहाल सरकार ने इस नए प्लान पर विशेषज्ञों और जनता से 15 दिन के भीतर सुझाव मांगे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में बाजार के लिए एक प्रमुख 'मॉनिटरेबल' फैक्टर होगा, क्योंकि इसी डेटा के आधार पर देश की आर्थिक सेहत का आकलन किया जाएगा।
