असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए दाखिल हुए टैक्स रिटर्न में बड़ा बदलाव दिखा है। कुल रिटर्न में से 62% अब केवल सैलरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें कैपिटल गेन्स और बिजनेस इनकम भी शामिल है। अगस्त की डेडलाइन तक **7.8 करोड़** से ज्यादा फाइलिंग हुई हैं, जो बाजार में रिटेल निवेशकों की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती हैं।
भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव आया है। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के डेटा के मुताबिक, 62% टैक्सपेयर्स ने ITR-1 (जो सिर्फ सैलरी इनकम के लिए है) से अलग फॉर्म भरे हैं। यह इस बात का सबूत है कि भारतीय निवेशक अब अपनी बचत को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रख रहे हैं।
टैक्सपेयर्स के प्रोफाइल में बदलाव
ITR-2, ITR-3 और ITR-4 जैसे जटिल फॉर्म्स की संख्या में उछाल यह बताता है कि मिडिल-क्लास अब केवल एक सैलरी पर निर्भर नहीं है। 25 साल से कम उम्र के युवाओं में ITR-3 फाइल करने का ट्रेंड बढ़ा है, जो बताता है कि युवा वर्कफोर्स अब साइड बिजनेस और शेयर बाजार से जल्दी कमाई शुरू कर रही है। वहीं, 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग भी अपने पोर्टफोलियो को एक्टिवली मैनेज कर रहे हैं और कैपिटल गेन्स रिपोर्ट कर रहे हैं।
रिस्क और सावधानी
ज्यादा कमाई के स्रोत होने का मतलब है- ज्यादा जिम्मेदारी। मार्केट से आने वाले कैपिटल गेन्स या बिजनेस प्रॉफिट को सही ढंग से रिपोर्ट न करना भारी पड़ सकता है। अगर आपने जानकारी गलत दी या फाइलिंग में देरी की, तो आपको लेट फीस, ब्याज (Interest) और सबसे महत्वपूर्ण- भविष्य में अपने लॉस (Losses) को आगे ले जाने (Carry Forward) के लाभ से हाथ धोना पड़ सकता है।
Income Tax Act, 2025 के नए नियमों के तहत अब रिकॉर्ड कीपिंग बहुत जरूरी हो गई है। निवेशकों को सलाह है कि वे अपने निवेश और मुनाफे का सही लेखा-जोखा रखें, ताकि छोटी सी गलती के कारण उनकी मेहनत की कमाई पेनल्टी के रूप में न चली जाए।
