वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर में AIIB की बैठक के दौरान सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, नेपाल और जॉर्डन के साथ निवेश समझौतों और डिजिटल पेमेंट इंटीग्रेशन पर अहम चर्चा की है।
निवेश सुरक्षा और नियामक ढांचा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर में आयोजित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की बैठक में कई देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। मुख्य एजेंडा निवेश अनिश्चितताओं को कम करना और वित्तीय दक्षता को बढ़ाना था। भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) पर जोर दिया गया, जो विदेशी निवेश (FDI) के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करेगा। सऊदी अरब भारत के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक बड़ा साझीदार है।
स्विस अधिकारियों के साथ बातचीत में नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) की भूमिका पर चर्चा हुई। स्विट्जरलैंड से भारत में आने वाले FDI को सुरक्षित करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर काम चल रहा है। साथ ही, GIFT सिटी को विदेशी कंपनियों के लिए एक प्रमुख हब के रूप में प्रमोट किया जा रहा है, ताकि लॉन्ग-टर्म इंस्टिट्यूशनल कैपिटल को आकर्षित किया जा सके।
डिजिटल पेमेंट्स और ट्रेड टारगेट्स
नेपाल के साथ हुई बातचीत में UPI के विस्तार पर जोर दिया गया। भारत के UPI और नेपाल के पेमेंट इंटरफेस का एकीकरण सीमा पार व्यापार को आसान बनाएगा, जिससे रेमिटेंस की लागत घटेगी।
वहीं, जॉर्डन के साथ भारत ने 2030 तक $5 बिलियन का व्यापार लक्ष्य तय किया है। फिलहाल भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। इन समझौतों का सीधा असर सप्लाई चेन और कमोडिटी व्यापार पर देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अब संस्थागत तंत्र (institutional mechanisms) पर भरोसा कर रहा है।
