सरकार ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इसके तहत **₹1.27 लाख करोड़** का निवेश किया जाएगा, जिसका मकसद देश में चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना है।
भारत अब सेमीकंडक्टर के मामले में 'आत्मनिर्भर' बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सरकार ने दूसरे चरण में ₹1.27 लाख करोड़ का बड़ा फंड आवंटित किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य अगले 5 सालों में भारत को केवल असेंबली हब से बदलकर हाई-एंड डिजाइन और फैब्रिकेशन का पावरहाउस बनाना है।
ग्लोबल कंपनियों का भरोसा
इस प्लान के तहत वैश्विक दिग्गज कंपनियां भी बड़ा निवेश कर रही हैं। Applied Materials ने 2035 तक के लिए USD 5 बिलियन का निवेश प्लान पेश किया है, वहीं Lam Research ने भारत में क्षमता बढ़ाने के लिए ₹10,000 करोड़ का निवेश तय किया है।
इसके अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है:
- Tata Electronics: धोलेरा (Dholera) में एक विशाल वेंडर पार्क विकसित कर रही है।
- Fujifilm: सेमीकंडक्टर सामग्री बनाने के लिए ₹800 करोड़ का निवेश करेगी।
- उत्तर प्रदेश: यहां नई डिस्प्ले टेक्नोलॉजी के प्लांट लगाए जा रहे हैं।
- Crystal Matrix: हाई-डेंसिटी LED स्क्रीन के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
पावर सेक्टर पर फोकस
सरकार ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगने वाले चिप्स के लोकलाइजेशन पर भी जोर दे रही है। ट्रांसफॉर्मर और ट्रांसमिशन लाइन्स में इस्तेमाल होने वाले इन हार्डवेयर के लिए विदेशी निर्भरता कम करने से ग्रिड स्टेबिलिटी में सुधार होगा।
निवेशकों के लिए राय
यह एक बड़ा और कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट है, जिसमें समय भी लंबा लगेगा। हालांकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सप्लाई चेन के लिए एक लॉन्ग-टर्म गेम-चेंजर है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इन प्लांट्स के एग्जीक्यूशन और टेक्नोलॉजी अडॉप्शन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। फिलहाल, धोलेरा पार्क और नए मटेरियल प्लांट्स के ऑपरेशन्स पर नजर रखना ही सबसे महत्वपूर्ण होगा।
