केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने जापान का दौरा कर सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश की नींव रखी है। सरकार का लक्ष्य **10 ट्रिलियन येन** के निवेश के जरिए ट्रेड डेफिसिट को कम करना है।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इस हफ्ते जापान के ओसाका, नागोया और टोक्यो में 200 से अधिक भारतीय उद्योगपतियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाना और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और भारी मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश आकर्षित करना है।
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों पर फोकस
सरकार भारत की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए गंभीर है। मंत्री ने ROHM Co. Ltd. के अधिकारियों के साथ भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने पर चर्चा की। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे के लिए Daiki Aluminium और Nippon Paint Holdings के साथ भी बातचीत हुई, ताकि जापानी तकनीक का लाभ उठाया जा सके। साथ ही, Mizuno Corporation के साथ स्पोर्ट्स गुड्स में जॉइंट वेंचर की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है।
ट्रेड डेफिसिट की बड़ी चुनौती
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में भारत और जापान के बीच कुल व्यापार $27.47 बिलियन रहा। इसमें भारत का आयात $21.43 बिलियन और निर्यात केवल $6.04 बिलियन था, जो एक बड़ा ट्रेड गैप दर्शाता है। इस असंतुलन को सुधारने के लिए अगले 10 सालों में 10 ट्रिलियन येन का निवेश लक्ष्य रखा गया है। ASSOCHAM का अनुमान है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2030 तक यह व्यापार $50 बिलियन तक पहुंच सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)
हालांकि, यह पहल काफी सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को एग्जीक्यूशन रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। सेमीकंडक्टर जैसे जटिल क्षेत्रों में प्लांट लगाने के लिए कुशल श्रम और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि केवल बैठकों से काम नहीं चलेगा, अब नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि कितनी जल्दी ये प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतरते हैं और आयात बिल में कितनी कमी आती है।
