कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भारत को ग्लोबल डेटा सेंटर हब बनाने की तैयारी तेज कर दी है। क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए **2047** तक टैक्स हॉलिडे की सौगात दी गई है, जिससे विदेशी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करने की योजना है।
भारत का 'कॉस्ट एडवांटेज'
सरकार का लक्ष्य भारत को अमेरिका और यूरोप के मुकाबले एक सस्ता विकल्प बनाना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर बनाना और चलाना पश्चिमी देशों के मुकाबले 20% से 25% तक सस्ता पड़ सकता है। इस ग्रोथ को तीन मुख्य पिलर्स का साथ मिल रहा है: हर साल 14 लाख STEM ग्रेजुएट्स, 60% रिन्यूएबल एनर्जी मिक्स वाली पावर सप्लाई, और बजट 2026-27 में घोषित 2047 तक का टैक्स हॉलिडे। यह सुविधा उन विदेशी कंपनियों के लिए है जो इंडियन रीसेलर के जरिए क्लाउड सर्विसेज दे रही हैं।
ग्लोबल ट्रेड पर पीयूष गोयल की दो टूक
G20 की चर्चाओं के दौरान, मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक 'ओवर-कैपेसिटी' और 'प्रिडेटरी प्राइसिंग' (Predatory Pricing) पर चिंता जताई। उनका मानना है कि सरकारी हस्तक्षेप से पैदा हुई अतिरिक्त क्षमता ग्लोबल मार्केट में फेयर कॉम्पिटिशन को नुकसान पहुंचाती है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाला समय ट्रेड पॉलिसी के लिहाज से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
टैक्स फायदों के अलावा, इस सेक्टर में बड़े रिस्क भी हैं। डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की जरूरत होगी, जिससे लोकल यूटिलिटी नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, टैक्स हॉलिडे की गाइडलाइंस और 'परमानेंट एस्टेब्लिशमेंट' (Permanent Establishment) से जुड़े कानूनी पेचीदगियां अभी भी स्पष्ट होनी बाकी हैं। निवेशकों को सरकार द्वारा जारी होने वाली अगली गाइडलाइंस और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए।
