ग्लोबल निवेशक अब केवल टेक स्टॉक्स के बजाय AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पावर और डेटा सेंटर्स में पैसा लगाने पर जोर दे रहे हैं। साल 2026 में विदेशी निवेशकों ने बाजार से **₹4 लाख करोड़** निकाले, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभाल रखा है, जबकि मार्केट में **13-15%** की गिरावट देखने को मिली है।
साल 2026 में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। पिछले दो सालों तक बाजार पर राज करने वाले प्योर-प्ले एआई (AI) टेक स्टॉक्स से अब ग्लोबल फंड मैनेजर्स का ध्यान हटकर उन भौतिक बुनियादी ढांचे पर आ गया है, जो एआई क्रांति को आगे बढ़ाएंगे। इसमें डेटा सेंटर्स, एनर्जी स्टोरेज और पावर कैपेसिटी शामिल है, जो भारत को कैपिटल इनफ्लो के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन बनाते हैं।\n\n### DIIs और FIIs का गणित\n\nसाल 2026 भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अब तक ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर का मजबूत होना है। हालांकि, भारतीय बाजार पूरी तरह से नहीं गिरा, जिसका श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को जाता है। DIIs ने बाजार में करीब ₹6.8 लाख करोड़ झोंके हैं, जिसने विदेशी बिकवाली के दबाव को कम किया है।\n\n### AI इंफ्रास्ट्रक्चर का अगला दौर\n\nएआई निवेश का पहला दौर अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया तक सीमित था, लेकिन अब निवेश बिजली और जमीन पर आधारित है। भारत का लक्ष्य 2028 तक $200 बिलियन का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश हासिल करना है। इसका फायदा पावर जेनरेशन, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और रियल एस्टेट कंपनियों को मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस क्षेत्र में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट 2025 में बढ़कर $4.1 बिलियन हो गया है, जो कि पिछले साल के मुकाबले तीन गुना है।\n\n### निवेश का नजरिया\n\nबाजार में 13-15% की गिरावट ने लंबे समय के निवेशकों के लिए एक अच्छा एंट्री पॉइंट बनाया है। एक्सपर्ट्स इसे 'सेकंड-मूवर' एडवांटेज मान रहे हैं, जहां भारत नॉर्थ एशियाई बाजारों से बाहर निकल रहे कैपिटल को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। हालांकि, निवेशकों को पावर उपलब्धता और सरकारी नियमों जैसे चुनौतियों पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तय करेंगे।
