कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल एक बड़े बिजनेस डेलीगेशन के साथ जर्मनी और नीदरलैंड के दौरे पर हैं। इस मिशन का मकसद मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और ऑटोमेशन में विदेशी निवेश को भारत लाना है, जिससे भारत और EU के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को और मजबूती मिलेगी।
कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल इस समय भारतीय इंडस्ट्री लीडर्स की एक टीम के साथ जर्मनी और नीदरलैंड के दौरे पर हैं। यह दौरा दिसंबर में होने वाली भारत-यूरोपीय संघ (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और अगले साल से इसके लागू होने से पहले आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
जर्मनी अभी भारत में निवेश करने वाला 10वां सबसे बड़ा देश है, लेकिन पिछले फाइनेंशियल ईयर में यहां से वास्तविक इनफ्लो केवल $495 मिलियन ही रहा। इस दौरे का मुख्य लक्ष्य जर्मनी की कंपनियों की दिलचस्पी को जमीनी स्तर पर बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स में तब्दील करना है।
किन सेक्टर्स पर रहेगी नज़र?
FICCI के अनुसार, भारत में स्टील, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत अभी भी ग्लोबल औसत से काफी कम है। इससे जर्मन कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा एक्सपोर्ट और डोमेस्टिक कंजम्पशन हब बन सकता है। चर्चा के मुख्य बिंदु:
- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 एप्लिकेशन।
- स्पेशलिटी केमिकल्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग।
- ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में जॉइंट वेंचर्स।
निवेशकों को यह समझना होगा कि यह एक लंबी प्रक्रिया है। बाजार की नजर अब उन आधिकारिक घोषणाओं पर है, जिनमें नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट्स या क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) के ठोस प्लान सामने आएंगे। जो कंपनियां इंजीनियरिंग और ग्रीन टेक सेक्टर में हैं, उन पर इस ट्रेड एग्रीमेंट के असर का सीधा असर पड़ सकता है।
