Gems and Jewellery Export: डिजाइन और ब्रांडिंग के दम पर ग्लोबल मार्केट में धाक जमाने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gems and Jewellery Export: डिजाइन और ब्रांडिंग के दम पर ग्लोबल मार्केट में धाक जमाने की तैयारी

भारत का ग्लोबल जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट में फिलहाल **8%** का हिस्सा है। इस हिस्सेदारी को और बढ़ाने के लिए NITI Aayog ने अब हाई-एंड डिजाइन, बेहतर ब्रांडिंग और पारदर्शिता पर जोर दिया है, जो भविष्य में इस सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग से डिजाइन की ओर बदलाव\n\nभारतीय जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अभी तक भारत का अधिकतर उद्योग OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) मॉडल पर काम करता रहा है, जहां विदेशी क्लाइंट्स के डिजाइन पर कटिंग और पॉलिशिंग का काम होता है। अब NITI Aayog की सिफारिश है कि कंपनियां ODM (ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर) मॉडल को अपनाएं। इससे कंपनियों को बेहतर प्रॉफिट मार्जिन मिल सकेगा।\n\n### पारदर्शिता है सफलता की कुंजी\n\nबाजार में भरोसे को बनाए रखने के लिए अब जेम्स और डायमंड्स की स्पष्ट पहचान पर जोर दिया जा रहा है। नेचुरल डायमंड और लैब-ग्रोन स्टोन के बीच अंतर करना अब अनिवार्य हो गया है। De Beers Group जैसे दिग्गज भी मानते हैं कि पारदर्शिता और ट्रैसेबिलिटी (Traceability) ही ग्लोबल खरीदारों को आकर्षित करने का सबसे बड़ा जरिया है।\n\n### संगठित क्षेत्र को फायदा\n\nजेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर में काफी हद तक बिखराव है और असंगठित छोटे यूनिट्स की भरमार है। सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंसिंग में सुधार पर काम कर रही है, ताकि इसे संगठित किया जा सके। Aditya Birla Group और GRT Group जैसी बड़ी कंपनियां पहले ही इस दिशा में सक्रिय दिख रही हैं।\n\nनिवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस नई स्ट्रैटेजी को कैसे लागू करती हैं। ब्रांडिंग और डिजाइन में भारी इन्वेस्टमेंट के बाद क्या कंपनियां अपने मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज कर पाती हैं, यह आने वाले समय में बड़ा टेस्ट होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.