भारत अब अपने डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे UPI) को विदेशों में एक्सपोर्ट करने की तैयारी कर रहा है। सरकार का मकसद IT सेक्टर पर निर्भरता कम कर सर्विस एक्सपोर्ट के दायरे को बढ़ाना है। अभी फाइनेंशियल सर्विसेज का एक्सपोर्ट **8 बिलियन डॉलर** है, जिसे और बड़ा करने का लक्ष्य है।
मुंबई में आयोजित 7वें Global Fintech Fest 2026 में सरकार ने एक नया रोडमैप पेश किया है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में, भारत अपनी Digital Public Infrastructure (DPI) को एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों तक ले जाने की योजना बना रहा है। अब तक भारत के सर्विस एक्सपोर्ट का 80% हिस्सा IT और कंसल्टेंसी के भरोसे रहा है, लेकिन अब सरकार एक नई और स्थायी रेवेन्यू स्ट्रीम तैयार करना चाहती है।
ग्लोबल साउथ के लिए मॉडल
भारत का प्लान उन देशों की मदद करना है जो अभी वैसी ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं जैसी भारत एक दशक पहले फेस कर रहा था। इसमें केवल UPI ही नहीं, बल्कि क्रेडिट, इंश्योरेंस और पेंशन जैसे सिस्टम भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सेक्टर में एथिकल डेटा यूज और कंज्यूमर प्रोटेक्शन पर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स सेट करने की वकालत की है।
सुरक्षा और रेगुलेशन की बड़ी चुनौती
इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर है कि साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी के मोर्चे पर भारत कैसे तालमेल बिठाता है। अलग-अलग देशों के सख्त नियम और रेगुलेटरी माहौल इस विस्तार में बड़ी रुकावट बन सकते हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अन्य देशों के साथ कैसे द्विपक्षीय समझौते (Bilateral Agreements) करता है और भविष्य में Fintech Consumer Protection Index को किस तरह लागू किया जाता है।
