NITI Aayog ने भारत को साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसके लिए देश को हर साल **9.25%** की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ हासिल करनी होगी।
भारत को अगले दो दशकों तक 9.25% की सालाना नॉमिनल ग्रोथ रेट बनाए रखनी होगी ताकि वह 2047 तक विकसित देशों की कतार में खड़ा हो सके। सरकार के थिंक टैंक NITI Aayog की इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रति व्यक्ति आय (per capita income) को मौजूदा $2,813 से बढ़ाकर $18,000 से $20,000 के बीच ले जाना है।\n\nयह रणनीति पूर्वी एशियाई देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के सफल 'ग्रोथ मॉडल' से प्रेरित है, जहां तेजी से औद्योगिकीकरण और एक्सपोर्ट-लीड ग्रोथ के जरिए अर्थव्यवस्थाओं ने कायापलट की थी।\n\n### ग्रोथ के तीन मुख्य पिलर्स\n\nNITI Aayog ने तीन क्षेत्रों को अर्थव्यवस्था की नींव माना है:\n\n1. एजुकेशन: इसे प्रोडक्टिविटी का इंजन बताया गया है। एक कुशल और इनोवेटिव वर्कफोर्स ही वैश्विक मानकों पर खरा उतर सकती है।\n2. हेल्थकेयर: एक स्वस्थ आबादी ही लंबे समय तक औद्योगिक उत्पादन और सर्विस डिलीवरी को बनाए रखने में सक्षम है।\n3. इंफ्रास्ट्रक्चर: इसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना गया है। सड़कों, पोर्ट्स और पावर सेक्टर में सरकारी खर्च से कंस्ट्रक्शन, सीमेंट और स्टील कंपनियों को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।\n\n### निवेशकों के लिए संकेत और जोखिम\n\nलॉन्ग-टर्म नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और स्किल डेवलपमेंट सेक्टर में निवेश के नए अवसर खुल रहे हैं। हालांकि, चुनौती यह है कि 9.25% की ग्रोथ को महंगाई के साथ कैसे बैलेंस किया जाए। अगर यह ग्रोथ केवल कीमतों में बढ़ोतरी से आती है और वास्तविक उत्पादन (real production) नहीं बढ़ता, तो आम नागरिक पर इसका असर सीमित होगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट्स का समय पर निष्पादन (execution) और ग्लोबल ट्रेड प्रेशर भी इस सफर की बड़ी चुनौतियां होंगी।
