वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत की **7%** ग्रोथ रेट का लक्ष्य फिर से दोहराया है। ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं के बावजूद सरकार स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और फिस्कल डिसिप्लिन के जरिए अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने पर जोर दे रही है।
भारत दुनिया भर में फैली आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद 2026-27 के लिए 7% या उससे अधिक की ग्रोथ रेट हासिल करने के लिए तैयार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि घरेलू मांग और बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स बाहरी झटकों को झेलने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं। हालांकि RBI ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% रखा है, लेकिन सरकार अपने लक्ष्यों को लेकर बेहद सकारात्मक है।
ग्लोबल सप्लाई चेन का जोखिम
इस ग्रोथ के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती ग्लोबल शिपिंग रूट्स की अस्थिरता है। 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, खासकर ऊर्जा और फर्टिलाइजर के आयात में भारी दिक्कतें आ रही हैं। भारत का करीब 80% फर्टिलाइजर इसी रूट से आता है, जिसे अब वैकल्पिक रास्तों के जरिए मंगाया जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक लागत बढ़ गई है।
इसका सीधा असर सरकार के खजाने पर पड़ रहा है। किसानों को राहत देने के लिए यूरिया की बोरी मात्र ₹300 में उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी खरीद लागत ₹3,000 प्रति बोरी तक पहुंच गई है। यह भारी सब्सिडी बोझ आने वाले समय में सरकारी खजाने (Fiscal Health) के लिए एक बड़ा मॉनिटरिंग पॉइंट बना हुआ है।
फिस्कल डिसिप्लिन और विजन 2047
सब्सिडी के दबाव के बावजूद सरकार फिस्कल कंसोलिडेशन पर अडिग है। लक्ष्य है कि 2030 तक सरकारी कर्ज को GDP के 50% तक लाया जाए। सरकार 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में कोई कटौती नहीं करना चाहती।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
निवेशकों को अब ग्लोबल एनर्जी कीमतों, महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मांग पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। सरकारी खजाने पर फर्टिलाइजर सब्सिडी का दबाव और कैपिटल स्पेंडिंग का तालमेल ही यह तय करेगा कि भारत अपनी 7% की रफ्तार को किस तरह कायम रखता है।
