भारत का GDP ग्रोथ टारगेट **7%** पर बरकरार है, हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और मॉनसून की अनिश्चितता बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, 15 अक्टूबर 2026 से **₹2,000** से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर **0.4%** का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है।
भारत की आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूती दिखा रही है। जानकारों और पीएम की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के नीलेश शाह जैसे विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में भी बेहतर प्रदर्शन कर रही है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने थोड़ी सावधानी बरतते हुए ग्रोथ का अनुमान 6.7% रखा है, लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट सकारात्मक बना हुआ है।
इकोनॉमी के सामने चुनौतियां
ग्रोथ की अच्छी उम्मीदों के बावजूद कुछ खतरे अभी भी बरकरार हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) के बढ़ते दाम देश के लिए चिंता का विषय हैं, जिससे महंगाई और रुपये की वैल्यू पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कम या अनियमित बारिश के कारण एग्रीकल्चर सेक्टर पर दबाव है, जो खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ा सकता है। बाजार पर नजर रखने वाले निवेशक अब यह देख रहे हैं कि इन ग्लोबल और लोकल फैक्टर्स का ब्याज दरों (Interest Rates) पर क्या असर पड़ेगा।
UPI पर नई पॉलिसी और MDR चार्ज
डिजिटल पेमेंट की दुनिया में 15 अक्टूबर 2026 से एक बड़ा बदलाव होने वाला है। सरकार ₹2,000 से ऊपर के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% का MDR चार्ज लागू करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सस्टेनेबल बनाना है। सरकार का तर्क है कि इसे लंबे समय तक फ्री मॉडल पर नहीं चलाया जा सकता। अच्छी बात यह है कि करीब 96% UPI ट्रांजैक्शन इस दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही, ₹75,000 या उससे बड़े पेमेंट पर ₹300 का अधिकतम कैप भी तय किया गया है।
विरोध और कानूनी स्थिति
इस फैसले का व्यापारियों ने विरोध भी किया है। AIMRA (ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन) ने इसे छोटे कारोबारियों के लिए नुकसानदेह बताया है। हालांकि, फिलहाल इस पर कोई स्टे नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से मना कर दिया है, लेकिन सरकार से इस मामले में हलफनामा जरूर मांगा है।
