अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने उम्मीद जताई है कि भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI का सही इस्तेमाल करके **7%** से **8%** की जीडीपी ग्रोथ को बरकरार रख सकता है।
ग्रोथ का नया फॉर्मूला
भारत की आर्थिक रफ्तार पर अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने बड़ा बयान दिया है। पहली तिमाही में 7.8% की शानदार ग्रोथ दर्ज करने के बाद, बर्गलोफ का मानना है कि भारत के पास अपनी विकास दर को 7% से 8% के बीच बनाए रखने का पूरा दम है। भारत के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद देश अपनी रफ्तार कायम रख सकता है।
AI का होगा बड़ा रोल
बर्गलोफ ने पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से हटकर एक नई राह सुझाई है। उनका तर्क है कि भारत को अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को AI के साथ जोड़ना चाहिए। इससे न केवल सर्विस और इंडस्ट्रियल सेक्टर की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि यह तकनीक रोजगार छीनने के बजाय आर्थिक बदलाव में एक 'बफर' का काम करेगी। ओपन-आर्किटेक्चर सिस्टम्स को अपनाकर भारत आउटपुट क्वालिटी को बेहतर बना सकता है।
ये रिस्क हैं चिंता की बात
ग्रोथ की अच्छी उम्मीदों के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं जिन पर इन्वेस्टर्स को नजर रखनी होगी:
- ग्लोबल तनाव: अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और सप्लाई चेन की दिक्कतें इंटरनेशनल कॉमर्स को प्रभावित कर रही हैं।
- क्लाइमेट रिस्क: जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाएं एग्रीकल्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रही हैं।
- US बॉन्ड यील्ड: बॉन्ड यील्ड में बढ़त से इमर्जिंग मार्केट्स के लिए फंडिंग कॉस्ट महंगी हो सकती है, जिससे कैपिटल और करेंसी की स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका है।
लंबी अवधि की रणनीति
बर्गलोफ का मानना है कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर रहने के बजाय एग्रीकल्चर, सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग तीनों में एक साथ प्रोग्रेस करनी चाहिए। इन्वेस्टर्स के लिए अब जीडीपी अपडेट्स, ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और घरेलू इंडस्ट्री में AI एडॉप्शन की रफ्तार सबसे बड़े 'की मॉनिटरेबल्स' (Key Monitorables) बने रहेंगे।
