टैक्सेशन बिल 2026: भारत में FDI बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा दांव

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AuthorAditya Rao|Published at:
टैक्सेशन बिल 2026: भारत में FDI बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा दांव

सरकार ने लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया है। इसका मकसद विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। बिल में इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और डायमंड ट्रेडिंग के लिए टैक्स छूट का ऐलान किया गया है, साथ ही GIFT सिटी में ऑफशोर फंड्स के नियमों को आसान बनाया गया है।

टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026

भारत सरकार ने 4 अगस्त, 2026 को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य रेगुलेटरी माहौल को आसान बनाना और ग्लोबल कैपिटल को भारत की ओर आकर्षित करना है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, ऑफशोर फंड मैनेजमेंट और डायमंड ट्रेड जैसे अहम सेक्टर्स को टारगेटेड टैक्स रिलीफ दी जाएगी। यह बिल जून 2026 में जारी किए गए इनकम-टैक्स (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस की जगह लेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर्स के लिए खास छूट

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए, बिल में विदेशी कंपनियों के लिए कैपिटल गुड्स और टूलिंग की सप्लाई पर 31 मार्च, 2041 तक टैक्स छूट का प्रस्ताव है। साथ ही, कंपोनेंट सप्लायर्स को कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में इनपुट स्टोर करने पर भी टैक्स बेनिफिट्स मिलेंगे। डेटा सेंटर इंडस्ट्री के लिए, यह कानून लीज्ड बेसिस पर फैसिलिटीज को ऑपरेट करने की सुविधा देकर नियमों को सरल बनाता है, जिससे अब डायरेक्ट ओनरशिप की पुरानी जरूरतें खत्म हो जाएंगी। इसका लक्ष्य भारत में ग्लोबल टेक्नोलॉजी प्लेयर्स के लिए एंट्री बैरियर्स को कम करना है।

ऑफशोर फंड्स और GIFT सिटी को बढ़ावा

ग्लोबल फंड मैनेजर्स को आकर्षित करना सरकार की प्राथमिकता है। बिल 'एलिजिबल इन्वेस्टमेंट फंड' की शर्तों को सरल बनाने का प्रयास करता है। मिनिमम कॉर्पस और इन्वेस्टर काउंट लिमिट जैसी कठोर शर्तों को हटाकर, सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा ऑफशोर फंड्स भारत और GIFT सिटी फाइनेंशियल हब में अपना ऑपरेशन शिफ्ट करें। इससे देश के भीतर से मैनेज किए जाने वाले फंड्स पर टैक्स का बोझ कम होगा।

डायमंड ट्रेड के लिए टैक्स राहत

डायमंड सेक्टर को गति देने के लिए, बिल नोटिफाइड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन्स में काम कर रही विदेशी कंपनियों के लिए 15 साल का टैक्स हॉलिडे लाया है। यह छूट 31 मार्च, 2041 तक लागू रहेगी, जिससे इन डेजिग्नेटेड एरियाज में कीमती पत्थरों के व्यापार में शामिल इंटरनेशनल माइनर्स और ट्रेडर्स को लॉन्ग-टर्म प्रेडिक्टिबिलिटी मिलेगी।

पेमेंट रेगुलेशन में बड़े बदलाव

टैक्स रिफॉर्म्स के अलावा, यह कानून पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में भी अमेंडमेंट करता है। इससे सरकार को खास इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स को नोटिफाई करने की अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जो मर्चेंट चार्जेज से एग्जेम्प्ट होंगे। यह डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और बैंक्स पर जीरो-मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) रेजीम के फाइनेंशियल बोझ से जुड़ी पुरानी चिंताओं को दूर करता है।

जोखिम और निगरानी

हालांकि बिल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखता है, लेकिन मार्केट पार्टिसिपेंट्स इसके इम्प्लीमेंटेशन की बारीकियों पर नजर रखेंगे। बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स पर संभावित प्रभाव एक अहम कंसर्न है, क्योंकि MDR चार्जेज को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी से ऑपरेशनल या प्रॉफिटेबिलिटी प्रेशर आ सकता है। इसके अलावा, 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया या नए RBI गाइडलाइंस के तहत 'फॉरेन कंट्रोल' की परिभाषा को लेकर संभावित डिस्प्यूट्स पर इन्वेस्टर्स सतर्क रह सकते हैं। इन रिफॉर्म्स का अंतिम असर नियमों की स्पष्टता और मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के साथ उनके इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.