केंद्र सरकार ने संसद में 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को **2041** तक टैक्स छूट का लाभ देना है, जो पहले **2031** में समाप्त हो रहा था। इस कदम से विदेशी और घरेलू कंपनियों को बड़ा फायदा होगा।
2041 तक मिलेगी टैक्स में छूट
सरकार का यह कदम देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मज़बूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' के ज़रिए, सरकार मौजूदा टैक्स नियमों को सरल बना रही है और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे पूंजी-गहन उद्योगों को लंबी अवधि के लिए स्पष्टता देना चाहती है।
इस बिल का एक अहम हिस्सा यह है कि विदेशी कंपनियों को घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को कैपिटल गुड्स सप्लाई करने पर मिलने वाली टैक्स छूट को 31 मार्च 2031 से बढ़ाकर 31 मार्च 2041 तक कर दिया गया है। यानी, इसमें 10 साल की बढ़ोतरी की गई है। इससे निवेशकों को पॉलिसी के मोर्चे पर स्थिरता मिलेगी और वे मशीनरी व इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना बना सकेंगे।
दायरा बड़ा, फायदे अनेक
टैक्स राहत का यह फायदा सिर्फ मोबाइल फोन कंपोनेंट्स तक ही सीमित नहीं रहेगा। अब लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और इनसे जुड़े एक्सेसरीज जैसे हाई-वैल्यू वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान भी इसके दायरे में आएंगे। यह भारत को हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे देश सिर्फ असेंबलिंग से आगे बढ़कर अधिक जटिल प्रोडक्ट्स भी बनाएगा।
बिजनेस ट्रस्ट और डिजिटल पेमेंट्स में भी सुधार
बिल में बिजनेस ट्रस्ट्स के लिए भी राहत का प्रावधान है। यूनिट होल्डर्स को तब डिविडेंड पर टैक्स छूट से वंचित नहीं किया जाएगा, जब स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) ने नई, कंसेशनल कॉर्पोरेट टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुना हो। इस बदलाव से इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए बिजनेस ट्रस्ट्स एक आकर्षक निवेश विकल्प बन सकते हैं।
इसके अलावा, सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में भी बदलाव कर रही है। बिल सरकार को यह अधिकार देगा कि वह कुछ खास इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स को बैंकों या पेमेंट प्रोवाइडर्स द्वारा लगाए जाने वाले चार्ज से छूट दे सके। इससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम होगी और व्यापार में डिजिटल पेमेंट्स को और बढ़ावा मिलेगा।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
यह बिल 'आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026' की जगह लेगा। निवेशकों को आगामी संसदीय बहसों पर नज़र रखनी चाहिए। नियमों के अंतिम रूप से स्पष्ट होने के बाद ही इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट लिस्ट के लिए विशिष्ट योग्यता मानदंड तय होंगे। इसका कंपनियों के मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मैन्युफैक्चरर्स इन टैक्स लाभों को कितनी जल्दी अपनी लागत संरचना में शामिल कर पाते हैं और क्या यह विस्तार घरेलू सप्लाई चेन में नए विदेशी निवेश को आकर्षित करने में सफल होता है।
