India-Switzerland Mobility Pact: ट्रेड और निवेश के लिए बड़ा कदम, जानें निवेशकों के लिए क्यों है अहम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India-Switzerland Mobility Pact: ट्रेड और निवेश के लिए बड़ा कदम, जानें निवेशकों के लिए क्यों है अहम

भारत और स्विट्जरलैंड ने माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए यात्रा आसान होगी। यह डील India-EFTA ट्रेड समझौते के तहत **$100 बिलियन** के निवेश का लक्ष्य लेकर चल रही है।

भारत और स्विट्जरलैंड ने 5 अक्टूबर, 2026 को माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप को औपचारिक रूप दिया है। इसमें 'यंग प्रोफेशनल्स एग्रीमेंट' भी शामिल है, जिसका मकसद छात्रों, रिसर्चर्स और कुशल कामगारों के लिए आवाजाही को सरल बनाना है। यह साझेदारी Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) का एक अहम हिस्सा है, जिसे EFTA ब्लॉक के साथ 1 अक्टूबर, 2026 को लागू हुए एक साल पूरा हुआ है।

$100 बिलियन का निवेश लक्ष्य

इस पूरे ढांचे का उद्देश्य अगले 15 सालों में भारत में $100 बिलियन का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना है। लाइफ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर खास जोर दिया जा रहा है।

ट्रेड डेफिसिट का जोखिम

हालांकि यह समझौता टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए नए रास्ते खोलेगा, लेकिन निवेशकों को ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) पर नजर रखनी होगी। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों से पता चला है कि EFTA देशों से भारत को होने वाला एक्सपोर्ट, भारत के एक्सपोर्ट के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। भारत के सामने चुनौती अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की है।

अन्य क्षेत्र और भविष्य

व्यापार के अलावा, दोनों देश रक्षा, परमाणु ऊर्जा और स्पेस टेक्नोलॉजी में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। स्विट्जरलैंड द्वारा आयोजित होने वाले 'जेनेवा AI समिट' के मद्देनजर दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क पर भी तालमेल बैठा रहे हैं। बाजार के जानकारों के लिए, अब TEPA के तहत आने वाले फंड के डिप्लॉयमेंट और एक्सपोर्ट डेटा पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.