Indian Steel Sector: **$400 बिलियन** के लक्ष्य के लिए सरकार की मदद क्यों जरूरी?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Steel Sector: **$400 बिलियन** के लक्ष्य के लिए सरकार की मदद क्यों जरूरी?

HSBC की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2047 तक भारतीय स्टील इंडस्ट्री को **$400 बिलियन** के भारी-भरकम निवेश की जरूरत है। हालांकि, इतने बड़े विस्तार के लिए कंपनियों को सरकारी सुरक्षा और इम्पोर्ट प्रोटेक्शन की सख्त जरूरत पड़ सकती है।

भारतीय स्टील सेक्टर इस समय एक बड़े विस्तार के दौर से गुजर रहा है। साल 2047 तक कंपनीज की क्षमता को 604 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए करीब $400 बिलियन की पूंजी की आवश्यकता होगी। HSBC की रिपोर्ट यह साफ संकेत दे रही है कि सिर्फ अपने कैश फ्लो के भरोसे यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है, खासकर तब जब बाजार में सस्ते विदेशी स्टील की भरमार हो।

$400 बिलियन का बड़ा खर्च

स्टील प्लांट लगाना काफी महंगा सौदा है। फिलहाल हर 1 मिलियन टन क्षमता बनाने पर करीब $1 बिलियन का खर्च आता है। इस हिसाब से 2047 तक पहुंचने के लिए कंपनियों को हर साल लगभग $20 बिलियन खर्च करने होंगे। मौजूदा ग्लोबल स्टील कीमतों ($500 प्रति टन) पर बिजनेस से होने वाला मुनाफा इस खर्च और ऑपरेशनल लागत को पूरा करने के लिए कम पड़ सकता है।

सरकारी नीतियों पर निर्भरता

भारतीय स्टील कंपनियों का मुनाफा सीधे सरकारी नीतियों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 11% की सेफगार्ड ड्यूटी या इसी तरह के संरक्षण उपाय कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 30% से 50% तक का बड़ा योगदान देते हैं। अगर सरकार सस्ते आयात पर लगाम नहीं लगाती, तो इन कंपनियों के मुनाफे में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे कर्ज का बोझ बढ़ना निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क है।

ग्रीन इन्वेस्टमेंट का दबाव

सिर्फ कैपेसिटी बढ़ाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना भी जरूरी है। कंपनियों को कार्बन इंटेंसिटी को 2.54 टन से घटाकर 1.54 टन पर लाना होगा। इसके लिए नई और साफ तकनीक में निवेश करना अनिवार्य है, जो अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा करेगा। साथ ही, कोकिंग कोल और स्टील स्क्रैप की बढ़ती मांग के लिए लॉजिस्टिक्स और माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े निवेश की जरूरत होगी।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

Tata Steel, JSW Steel, SAIL, Jindal Steel & Power और AM/NS India जैसे शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों को एंटी-डंपिंग ड्यूटी और सरकारी फैसलों पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, कच्चा माल (कोकिंग कोल) की कीमतें और कंपनियों का डेट-टू-इक्विटी रेशियो आने वाले समय में उनकी सेहत तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.