भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए बजट प्रक्रिया की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। **12 अक्टूबर, 2026** से प्री-बजट बैठकों का दौर शुरू हो गया है, जो मुश्किल वैश्विक आर्थिक हालातों के बीच सरकार के वित्तीय अनुशासन पर जोर देता है।
भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) के बजट की तैयारी समय से पहले शुरू कर दी है। 12 अक्टूबर, 2026 को e-Lekha सिस्टम में नए फाइनेंशियल ईयर का टैब इनेबल करने के साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर ने मंत्रालयों से खर्च के प्रस्ताव मांगने शुरू कर दिए हैं। इस कदम का मकसद बेहतर प्लानिंग और आखिरी समय में होने वाले बदलावों को कम करना है।\n\n### वित्तीय अनुशासन और विकास का तालमेल\n\nबाजार के नजरिए से देखें तो यह जल्दी शुरू हुई प्रक्रिया सरकारी प्रतिबद्धता को दिखाती है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए फिस्कल डेफिसिट को 4.3% पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। FY28 की प्रक्रिया जल्द शुरू करके सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नई योजनाओं के लिए रेवेन्यू और उधारी के अनुमान पूरी तरह से सटीक हों।\n\n### RBI का रुख और बढ़ती चुनौतियां\n\nआर्थिक मोर्चे पर आरबीआई (RBI) ने अक्टूबर 2026 में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इसका सीधा असर सरकारी उधारी की लागत पर पड़ता है। बढ़ती ब्याज दरों के दौर में सरकार के लिए विकास कार्यों को फंड करना और साथ ही डेट-टू-GDP अनुपात को मैनेज करना बड़ी चुनौती होगी।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम और निगरानी\n\nइन्फ्रास्ट्रक्चर और कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाला सरकारी खर्च हाल के समय में ग्रोथ का बड़ा इंजन रहा है। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक अनिश्चितताएं राजस्व पर असर डाल सकती हैं। कंस्ट्रक्शन, सीमेंट और स्टील जैसे सेक्टर्स के लिए यह जरूरी है कि सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार को बरकरार रखे। अब निवेशक यह देखेंगे कि सरकार कैसे अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को महंगे कर्ज के बावजूद पटरी पर रखती है।
