भारत ने अपने AI रोडमैप में बड़ा बदलाव किया है। सरकार अब महंगे हार्डवेयर सब्सिडी के बजाय IT सर्विसेज पर दांव लगा रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में IT सर्विस एक्सपोर्ट में **12%** की ग्रोथ देखी गई है, जबकि सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में गिरावट आई है।
भारत अब ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में अपनी रणनीति बदल रहा है। नीति निर्माताओं का मानना है कि स्क्रैच से हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना बहुत महंगा और चुनौतीपूर्ण है, इसलिए अब भारत अपनी पारंपरिक ताकत यानी IT सर्विसेज, कंसल्टिंग और ह्यूमन-सेंट्रिक इंटेलिजेंस पर फोकस कर रहा है।
आंकड़ों में क्यों आया यह बदलाव?
हालिया डेटा के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में IT सर्विस एक्सपोर्ट में 12% का इजाफा हुआ है, जबकि सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में लगभग 6% की गिरावट दर्ज की गई। यह साफ संकेत है कि भारत की असली ताकत कॉम्प्लेक्स एंटरप्राइज सॉल्यूशंस को मैनेज करने में है, न कि ग्लोबल कंपनियों के साथ GPU की जंग में उलझने में।
इंडिया AI मिशन और चुनौतियां
मार्च 2024 में ₹10,371 करोड़ के आउटले के साथ शुरू हुए 'इंडिया AI मिशन' का मकसद 38,000 से ज्यादा GPU तैनात करना था। लेकिन विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता और एडवांस प्रोसेसर की ऊंची कीमतों के कारण यह मॉडल फिलहाल मुश्किलों में है। घरेलू स्तर पर GPU का इस्तेमाल भी कम है, क्योंकि हाई-एंड कंप्यूटिंग के लिए अभी पर्याप्त डिमांड नहीं है।
सरकार ने अब इसके विकल्प के तौर पर 2026-27 के बजट में 2047 तक के लिए टैक्स हॉलिडे का ऐलान किया है। इसका मकसद डेटा सेंटर्स को बढ़ावा देना है। साथ ही, 'सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के तहत 'इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट स्कीम' को ₹40,000 करोड़ का बूस्ट दिया गया है।
IT सर्विसेज के लिए नया मौका
डेटा बताता है कि भारत में केवल 15% कॉर्पोरेट AI प्रोजेक्ट्स ही बड़े स्तर पर सफल हो पाए हैं। इसका बड़ा कारण टेक्निकल ओवरसाइट की कमी है। यहीं पर IT सर्विसेज कंपनियों का रोल अहम हो जाता है। बैंकिंग और फाइनेंस जैसे सेक्टर में AI के साथ मानवीय दखल (Human oversight) और ऑडिटिंग की बहुत जरूरत है, जो भारत की IT कंपनियां बेहतर तरीके से दे सकती हैं।
निवेशकों के लिए नजरिया
यह पॉलिसी शिफ्ट टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर है। हार्डवेयर फर्मों के लिए कंपटीशन कड़ा हो सकता है, लेकिन IT सर्विसेज कंपनियां AI इंटीग्रेशन और कंसल्टिंग की डिमांड बढ़ने से फायदा उठा सकती हैं। निवेशकों को अब डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और AI एडॉप्शन रेट पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
