सरकार ने साल 2028 तक पूरी तरह से भारत में डिजाइन और मैन्युफैक्चर किए गए मोबाइल फोन और सेमीकंडक्टर चिप्स का लक्ष्य रखा है। साथ ही, AI के लिए भी नए नियम बनाने की तैयारी है, जो टेक सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है।
AI रेगुलेशन और नई नीति
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक औपचारिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने की योजना बनाई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि आने वाले हफ्तों में AI कानून पर एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा मानकों को तय करना और संभावित खतरों को कम करना है ताकि घरेलू उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहे।
2028 तक का महत्वाकांक्षी रोडमैप
सरकार अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसे ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरिंग (ODM) में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत अब तक 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी दी जा चुकी है और छठा प्लांट जल्द ही लॉन्च के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर चिप डिजाइन का केंद्र बनाना है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए सरकार का समर्थन तो मजबूत है, लेकिन निवेशकों को 'एग्जीक्यूशन रिस्क' पर नजर रखनी चाहिए। सेमीकंडक्टर प्लांट लगाना एक पूंजी-गहन (Capital-intensive) प्रक्रिया है, जिसमें कई साल लगते हैं। हालांकि प्रोत्साहन योजनाएं लागत को कम करने के लिए हैं, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी या लागत का बढ़ना मुनाफे पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, भारत अभी भी कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है, जिसे 2028 तक पूरी तरह स्थानीय सप्लाई चेन में बदलना एक बड़ी चुनौती होगी।
